नए वार्डो में रोशनी बांटेगी जहर

2019-05-17T06:00:52+05:30

- सिटी एरिया से हटाई गई सोडियम स्ट्रीट लाइट्स लगाई जा रही नए वार्डो में

- सोडियम बल्ब पर्यावरण व स्वास्थ्य दोनों के लिए घातक

- बल्ब में मरकरी का होता है वैपोराइजेशन, मरकरी है प्वॉइजन

- पावर कंजप्शन भी ज्यादा करता है सोडियम बल्ब, निगम का बढ़ेगा बिल

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42000 सोडियम स्ट्रीट लाइट्स हटाई थी निगम ने पुराने वार्डो से

7000 सोडियम लाइट्स लगा दी गई नए वार्डो में

40 वार्डो में लगाए जा रहे सोडियम बल्ब

250 वॉट कैपेसिटी के लगाए जा रहे बल्ब

110 वॉट तक का एलईडी देता है इतनी ही लाइट

देहरादून, नगर निगम के नए रूरल वार्डो में रोशनी के नाम पर जहर बांटा जा रहा है। शहर से निकाली गई सोडियम स्ट्रीट लाइट्स रूरल वार्डो में लगाई जा रही है, ये लाइट्स अपने आप में बड़ा खतरा है। सोडियम बल्ब के अंदर मरकरी (पारा) पाया जाता है, जिसके वैपोरेशन से ही बल्ब जगमगाता है। पारा जहर जैसा है, वैपोरेशन के दौरान ये पर्यावरण के लिए तो खतरा है ही, जन स्वास्थ्य के लिए भी घातक है। इसका स्टोरेज भी असावधानी से किया जाए तो खतरनाक हो सकता है। इसी कारण अब सोडियम लाइट्स को हटाकर एलईडी लाइट्स लगाई जा रही हैं। वहीं, सोडियम लाइट्स ज्यादा पावर कंजप्शन करते हैं, इसलिए ये नुकसान का कारण भी बनेंगे।

पुराने वार्डो से उतारकर नए में लगाए

सोडियम स्ट्रीट लाइट्स से खतरा और बिजली की ज्यादा खपत से बचने के लिए नगर निगम ने पुराने 60 वार्डो में लगे सोडियम लैंप हटाकर एलईडी लैंप लगाए। केंद्र सरकार की इनर्जी एफिशिएंसी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा यह काम किया जा रहा है। लेकिन, अब निगम की सीमा विस्तार के बाद बने 40 नए वार्डो में इन्हें स्ट्रीट लाइट्स के लिए लगाया जा रहा है। करीब 7000 सोडियम लाइट्स 40 वार्डो में जरूरत के हिसाब से लगाए भी जा चुके हैं, अभी भी कई वार्डो में इन्हें लगाया जाना है।

सेफ्टी पर सवाल

नगर निगम द्वारा पुराने वार्डो से सोडियम स्ट्रीट लाइट्स के रूप में नए वार्डो में खतरा शिफ्ट किया जा रहा है, जो सेफ्टी पर सवाल उठाता है। सोडियम लाइट्स वैरोराइजेशन के कारण पारे का वातावरण में घुलना घातक हो सकता है। जन स्वास्थ्य के लिए भी इसका विकिरण नुकसानदायक है।

पावर कंजप्शन बढे़गा

नए 40 वार्डो में अब तक 7 हजार सोडियम लाइट्स लगाई जा चुकी हैं। जाहिर है ये ज्यादा पावर कंजप्शन करते हैं। ऐसे में निगम पर ज्यादा लोड पड़ना तय है। शहरी क्षेत्र से सोडियम लाइट्स हटाने का मकसद भी पावर सेविंग था और निगम का बिजली का बिल कम करना था। ऐसे में ये मकसद अब पूरा होता नहीं दिख रहा।

सोडियम वैपर लैंप से नुकसान

- सोडियम वैपर लैंप में एक ट्यूब में मरकरी (पारा) फिल होता है, जो घातक है।

- पारे के वैपोराइजेशन से ही बल्ब जगमगाता है, इसका वैपोराइजेशन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।

- सोडियम बल्ब ज्यादा पावर कंजप्शन करता है, इससे निगम को आर्थिक रूप से नुकसान होगा।

- सही रोशनी के लिए 250 वॉट तक का सोडियम बल्ब जरूरी, जबकि इतनी ही रोशनी 70 से 110 वॉट का एलईडी बल्ब जनरेट करता है।

- सोडियम लाइट्स से पीली रोशनी पैदा होती है, जो क्लियर विजिबिलिटी नहीं देती।

42 हजार लाइट्स हटाई थीं

नगर निगम द्वारा शहरभर में लगी 42 हजार सोडियम लाइट्स हटाकर उनके स्थान पर एलईडी लैंप लगाने की योजना थी। कई जगह एलईडी लाइट्स अभी तक लगाई जा रही हैं। सोडियम लाइट्स को उतारकर निगम के स्टोर में जमा कर दिया गया था, निगम का दावा था कि अब सोडियम लाइट्स लगानी बंद कर दी जाएंगी और इनका निस्तारण किया जाएगा। लेकिन, नए वार्डो से स्ट्रीट लाइट्स की लगातार डिमांड आ रही थी, ऐसे में निगम ने इन्हीं खतरनाक लाइट्स को नए वार्डो में लगाना शुरू कर दिया।

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नए वार्डो में जिन इलाकों में पथ प्रकाश की व्यवस्था नहीं है, वहां सोडियम लाइट्स लगाई जा रही हैं। निगम के पास अभी एलईडी लाइट्स नहीं हैं, ऐसे में फिलहाल सोडियम लाइट्स ही लगाई जा रही हैं। लोकसभा इलेक्शन की आचार संहिता समाप्त होने के बाद नए वार्डो के लिए भी एलईडी लाइट्स ली जाएंगी।

सुनील उनियाल गामा, मेयर

नए वार्डो में एलईडी लाइट्स के लिए बोर्ड मीटिंग में प्रपोजल लाया जाएगा। अभी सोडियम लाइट्स लगाई जा रही हैं। 40 वार्डो में करीब 7 हजार लाइट्स लग चुकी हैं।

नीरज जोशी, अपर आयुक्त, नगर निगम

inextlive from Dehradun News Desk


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