बिना द्रोणाचार्य के कैसे बनेंगे अर्जुन

2019-02-22T06:01:14+05:30

- एक महीने से आठ खेलों के कोच नहीं हैं, विभाग नहीं ले रहा सुध

-स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में खिलाडि़यों का भविष्य भगवान भरोसे

बरेली : महाभारत में अर्जुन सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी थे, लेकिन उन्हें जिसके प्रशिक्षण ने सर्वश्रेष्ठ बनाया वो थे गुरु द्रोणाचार्य। गुरु के बिना शिष्य सफलता के शिखर पर नहीं पहुंच सकता है। ऐसे में शहर स्थित स्पो‌र्ट्स स्टेडियम के खिलाड़ी कैसे अर्जुन बनेंगे जबकि पिछले डेढ़ महीने से यहां आठ खेलों के लिए गुरु यानि कोच ही नहीं है। ऐसी स्थितियों में यहां के खिलाडि़यों से मेडल की उम्मीद कैसे की जा सकती है। यहां आने वाले खिलाडि़यों का भविष्य भगवान भरोसे है। खिलाड़ी रोज यहां प्रैक्टिस के लिए आते हैं, लेकिन कोच न होने से वह खुद ही प्रैक्टिस कर चले जाते हैं। हैरत की बात तो यह है कि विभागीय अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी इसकी सुध नहीं लेते हैं। वहीं सुविधाओं के अभाव में ही शहर के खिलाड़ी दूसरे शहरों की ओर रुख कर रहे हैं।

इन खेलों के नहीं हैं कोच

1. बास्केटबॉल

2. बॉक्सिंग

3. बैडमिंटन

4. हॉकी

5. वेटलिफ्टिंग

6. टेबल टेनिस

7. फुटबॉल

8. हैंडबॉल

नौ महीने का होता है करार

स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में हर वर्ष विभिन्न खेलों के लिए अंशकालिक प्रशिक्षक भर्ती किए जाते हैं। इन प्रशिक्षकों का विभाग से नौ महीने का करार होता है। पिछले वर्ष अप्रैल 2018 में प्रशिक्षक रखे गए, जिनका करार दिसंबर 2018 में खत्म हो गया। जिसकी वजह से खिलाड़ी जनवरी 2019 से अब तक बिना कोच के ही प्रैक्टिस कर रहे हैं। स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में अंशकालिक कोच को शासन की ओर से 25 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाता है।

तो चार महीने करना होगा इंतजार

वैसे तो स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में हर वर्ष तीन महीने कोच का अकाल रहता है। इस वर्ष लोकसभा चुनाव होने हैं जिसके चलते आचार संहिता लागू हो जाएगी। इससे भर्ती प्रक्रिया नहीं हो सकेगी। चुनाव यानि चार महीन के बाद ही खिलाडि़यों को नए कोच मिल सकेंगे।

जो दिला रहे मेडल, उनके साथ पक्षपात

स्टेडियम के बास्केटवॉल कोच सोनेंद्र श्रोत्रिय हैं, लेकिन वह भी अंशकालिक हैं। उनसे खेल के गुर सीखकर यहां के कई खिलाडि़यों ने नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। शहर के रहने वाले पुलकित सचदेवा ने इन्हीं के प्रशिक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं। वह बॉस्केटवाल जूनियर इंडिया टीम का हिस्सा रहे हैं।

अंशकालिक प्रशिक्षकों की बात

हम लोग जीतोड़ मेहनत करते हैं खिलाडि़यों के अभ्यास में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार कर चुके हैं जिन्होंने दूसरे देशों में देश का मान बढ़ाया है।

सोनेंद्र श्रोत्रिय, पूर्व कोच, बास्केटबॉल

हर वर्ष ट्रायल से हम प्रशिक्षकों की भर्ती होती है। खुद को साबित करने के बाद हम मैदान में खिलाडि़यों के सामने पहुंचते हैं। हमारे तैयार किए हुए खिलाडि़यों का प्रदर्शन भी उत्कृष्ट रहा है।

विनय गोस्वामी, फुटबॉल।

वर्जन -

अंशकालिक मानदेय प्रशिक्षकों का करार समाप्त हो गया है, जिस कारण कुछ खेलों के कोच नहीं है। हर वर्ष की तरह निदेशालय की ओर से भर्ती प्रक्रिया होगी।

लक्ष्मी शंकर सिंह, आरएसओ।

inextlive from Bareilly News Desk


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