एक साल का लेखा जोखा Sports के नजरिए से

2011-12-30T17:05:00+05:30

हिंदुस्‍तान के sports world में इस साल क्‍या हुआ सबका हिसाब किताब लगाता एक आर्टिकल

भारत ने वर्ष 2011 में अंतरराष्ट्रीय खेलों में अपनी मजबूत पहचान बनाई जब क्रिकेटरों ने 28 बरस बाद विश्व कप पर कब्जा जमाया जबकि देश ने पहली बार फार्मूला वन रेस का आयोजन किया।
 भारतीय खेलों को कुछ झटकों का भी सामना करना पड़ा लेकिन इसके बावजूद देश ने खेल के क्षेत्र में कुछ बड़े मुकाम हासिल किए.  क्रिकेट के दीवाने देश को सबसे बड़ा तोहफा महेंद्र सिंह धोनी की टीम ने विश्व कप जीतकर दिया जिसका आयोजन उपमहाद्वीप के तीन देशों ने मिलकर किया। घरेलू परिस्थितियों में टीम से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन काफी लोगों ने यह नहीं सोचा था कि यह टीम 1983 की कपिल देव की टीम की उपलब्धि को दोहरा पाएगी।

 लेकिन टीम ने दो अप्रैल को मुंबई में खचाखच भरे स्टेडियम में श्रीलंका को हराकर वह कारनामा किया जिससे पूरा देश जश्न के माहौल में डूब गया.  इंग्लैंड के तीन महीने के दौरे के दौरान खेल के तीनों प्रारूपों टेस्ट, वनडे और ट्वेंटी20 में एक भी मैच जीतने में नाकाम रहना
भारतीय टीम की नींद तोडऩे वाला था। इसके बावजूद 2011 को भारत क्रिकेट के लिए विश्व कप जीत के रूप में ही याद किया जाएगा।
 यह विश्व कप सचिन तेंदुलकर के लिए भी यादगार रहा जो छठी और संभवत: अंतिम बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में शिरकत कर रहे थे। यह महान बल्लेबाज हालांकि इस साल 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों के इंतजार को खत्म नहीं कर पाया और यह उपलब्धि हासिल करने के लिए उन्हें अब भी एक शतक की जरूरत है.  तेंदुलकर ने अपना 99वां शतक इस साल मार्च में विश्व कप के दौरान लगाया था लेकिन वह इसके बाद नौ महीने में शतकों का शतक पूरा नहीं कर पाए। इस बीच वीरेंद्र सहवाग ने तेंदुलकर के एकदिवसीय क्रिकेट में दोहरे शतक के रिकार्ड की बराबरी की और इस दौरान वनडे क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत पारी खेलने वाले बल्लेबाज भी बने।
 क्रिकेट से अलग फुटबाल सुपर स्टार लियोनल मेस्सी ने अपनी टीम के साथ भारतीय धरती पर कदम रखा और पूरा कोलकाता सितंबर में मेस्सी मेनिया में डूब गया.  मेस्सी के आने और नहीं आने को लेकर काफी अटकलें लगी लेकिन अर्जेन्टीना और बार्सिलोना ने अपना वादा निभाया और इस दिग्गज ने कोलकाता के फुटबाल के दीवाने लोगों के बीच खचाखच भरे युवा भारती क्रीड़ांगन में पहली बार वेनेजुएला के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच में अपने देश का नेतृत्व किया।
 इसके एक महीने बाद ग्रेटर नोएडा में पहली बार भारत में फार्मूला वन रेस का आयोजन किया गया जहां नवनिर्मित बुद्ध अंतरराष्ट्रीय सर्किट में प्रशंसकों को 350 किमी प्रतिघंटा से अधिक की रफ्तार में गाडिय़ों को दौड़ते हुए देखने का मौका मिला.  पहली बार आयोजन के कारण कुछ छोटी मोटी खामियों को छोड़ दिया जाए तो फार्मला वन के साथ भारत का मिलन काफी सफल रहा और लुइस हैमिल्टन से लेकर सबेस्टियन वेटेल और जर्मनी के अनुभवी माइकल शुमाकर तक सुविधाओं से काफी खुश दिखे।
 भारत खेलों ने जहां सफलताओं को चूका वहीं कुछ विवादों का भी सामना करना पड़ा। हाकी इंडिया और भारतीय हाकी महासंघ के बीच सत्ता को लेकर लड़ाई जारी रही जिससे भारत ने चैम्पियन्स ट्राफी की मेजबानी गंवा दी। खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ के बीच खींचतान जारी रही जबकि डोप मामले में फंसने के कारण कुछ एथलीटों का लंदन ओलंपिक का सपना टूट गया। भारतीय हाकी टीम ने टुकड़ों में अच्छा प्रदर्शन किया। टीम ने एशियाई चैम्पियन्स ट्राफी का खिताब जीता लेकिन चैम्पियन्स चैलेंज के फाइनल में हार गई और इसके साथ अगले साल चैम्पियन्स ट्राफी में खेलने का मौका गंवा दिया। टीम को इस बीच आस्ट्रेलिया के माइकल नोब्स के रूप में नया कोच भी मिला।
 क्रिकेटरों से जुड़ी हाइप के बीच इस साल भी निशानेबाजों का दमदार प्रदर्शन जारी रहा और पिछले साल दो के बाद इस साल सात निशानेबाज ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में सफल रहे। गगन नारंग और हरिओम सिंह ने पिछले साल ही लंदन का टिकट पक्का कर लिया था जबकि इस साल बीजिंग ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा, ग्वांग्झू एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता रोंजन सिंह सोढ़ी, संजीव राजपूत, विजय कुमार, राही सरनोबत, अनु राज सिंह और शगुन चौधरी ने इस साल यह उपलब्धि हासिल की।
 भारतीय निशानेबाजी के लिए एक और अच्छी खबर रही जब नारंग को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया जबकि डबल ट्रैप निशोनबाज सोढ़ी दुनिया के नंबर एक निशानेबाज बने.
 एथलेटिक्स में कृष्णा पूनिया :महिला चक्का फेंक:, टिंटू लूका :महिला 800 मीटर:, मयूखा जानी :महिला त्रिकूद:, गुरमीत सिंह :पुरुष 20 किमी पैदल चाल:, ओम प्रकाश करहाना :पुरुष शाट पुट: ने क्वालीफाइंग स्तर हासिल करने के बाद अपनी ओलंपिक की तैयारी शुरू की लेकिन डोप के डंक ने एथलेटिक्स को बदनाम किया। देश के शीर्ष सात एथलीट डोपिंग में फंसे जिसमें तीन राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों की स्वर्ण विजेता एथलीट थी।
 एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता अश्विन अकुंजी, उनकी चार गुणा चार सौ मीटर की साथी सिनी जोस और मनदीप कौर, प्रियंका पंवार, जौना मुर्मू और टियाना मैरी थामस को प्रतिबंधित पदार्थों के सेवन के लिए एक एक साल के लिए प्रतिबंधित किया गया जबकि लंबी कूद के खिलाड़ी हरि कृष्णनन पर दो साल का प्रतिबंध लगाया गया.  मुक्केबाजी से अच्छी खबर आई जब चार मुक्केबाजों 19 वर्षीय एल देवेंद्रो सिंह :49 किग्रा: और विकास कृष्ण :69 किग्रा: के अलावा जय भगवान :60 किग्रा: और मनोज कुमार :64 किग्रा: सितंबर में हुई विश्व चैम्पियनशिप के जरिए ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में सफल रहे। विकास ने विश्व चैम्पियनशिप में भारत की ओर से एकमात्र कांस्य पदक भी जीता।
 बैडमिंटन में साइना नेहवाल अधिकतर समय टखने की चोट से परेशान रही लेकिन इसके बावजूद वह विश्व सुपर सीरीज फाइनल्स के खिताबी मुकाबले में पहुंचने वाली पहली भारतीय भी बनी। साइना की अपने कोच पुलेला गोपीचंद के साथ मतभेद के कारण अलगाव भी हुआ लेकिन जल्द ही इन दोनों ने अपने मतभेद भुला दिए और फिर साथ आ गए।
 तीरंदाजी में 17 वर्षीय दीपिका कुमारी का जलवा देखने को मिला जबकि पुरुष टीम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। विश्व
चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल में दीपिका, एल बोम्बाल्या देवी और चेकरोवेलू स्वुरो की तिकड़ी ने विश्व चैम्पियन कोरिया को हराकर उलटफेर किया और लंदन के लिए पूरा कोटा भी हासिल किया.
 टेनिस इस साल जुड़ाव और अलगाव का गवाह बना। लिएंडर पेस और महेश भूपति ने ओलंपिक पदक जीतने के लक्ष्य के साथ नौ साल बाद फिर जोड़ी बनाई लेकिन कुछ महीनों के अंदर ही यह साथ दोबारा छूट गया। इस जोड़ी के टूटने का असर रोहन बोपन्ना और पाकिस्तान के ऐसाम उल हक कुरैशी की सफल जोड़ी पर भी पड़ा और यह भी टूट गई.  भूपति आगामी सत्र में ओलंपिक तक बोपन्ना के साथ जोड़ी बनाएंगे। पेस चेन्नई ओपन में सर्बिया के यांको टिप्सरेविच के साथ खेलेंगे जबकि इसके बाद टूर प्रतियोगिताओं में राडेक स्टेपनेक के साथ जोड़ी बनाएंगे।



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