स्टेडियम में ऐसे होता है गेम

2013-04-20T10:45:05+05:30

Meerut इस बार छुïट्टयों में अगर आप अपने बच्चे को कैलाश प्रकाश स्पोट्र्स स्टेडियम में कोई स्पोर्ट ज्वाइन कराने की सोच रहे हैं तो आपको निराशा हाथ सकती है

 स्टेडियम कई खेलों में कोच नहीं होने के चलते एक मार्च से सूना पड़ा है। बावजूद इसके  खिलाड़ी खुद ही प्रैक्टिस कर हौसला बनाए रखते हैं।
फुटबॉल
सोमवार की शाम को सबसे पहले स्टेडियम में फुटबॉल का जायजा लिया गया। यहां पिछले सत्र में अंशकालिक कोच रहे ललित पंत के नहीं होने के कारण खिलाड़ी खुद ही प्रैक्टिस करते मिले। फुटबॉल ग्राउंड में करीब 20 खिलाड़ी आपस में ही एक दूसरे को सीख दे रहे थे, लेकिन उन्हें सिखाने वाले कोच यहां मौजूद नहीं थे।
वुशू
वुशू खेल लगातार बढ़ पा रहा है। इस खेल में खिलाड़ी अच्छा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार इसके बावजूद इस खेल में स्टेडियम में सरकारी कोच की तैनाती नहीं कर रहा है। जिसकी वजह से अंशकालिक कोच का कैंप समाप्त होते ही खिलाडिय़ों के सिर मुसीबत आ जाती है। फिलहाल वुशू एरिना में भी खिलाड़ी आपस में ही तालमेल बिठाकर प्रैक्टिस कर रहे हैं। ताउलु वर्ग के खिलाड़ी अकेले ही छलांग लगाते दिखे। यहां पर एक के बाद एक खिलाड़ी प्रैक्टिस करते मिले। दूसरी और सान्साऊ वर्ग में भी दो खिलाड़ी आपस में ही किक और पंच की प्रैक्टिस कर रहे थे।
एथलेटिक्स
एथलेटिक्स में भी 150 के करीब खिलाडिय़ों के लिए कोई कोच नहीं है। यहां पिछले सत्र में अंशकालिक कोच रहे गौरव त्यागी का  कैंप एक मार्च को खत्म हो गया था। एथलेटिक्स में खिलाडिय़ों की संख्या बेहद ज्यादा है। खिलाडिय़ों को एक बेहतर कोचिंग मिल पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। अगले दो तीन महीने तक खिलाडिय़ों को ये बेहतर सुविधा मिलती भी नजर नहीं आ रही है।
बास्केटबॉल
बास्केटबॉल कोर्ट में भी युवाओं की सबसे ज्यादा तादाद नजर आती है। ये तादाद अभी भी है। इस खेल में  स्टेडियम में अंशकालिक कोच ओमकार की तैनाती थी, लेकिन अब यहां बास्केटबॉल खिलाड़ी खुद ही प्रैक्टिस कर रहे हैं, कभी-कभी शौकिया तौर पर जरूर ओमकार स्टेडियम पहुंच जाते हैं। ओमकार समेत स्टेडियम में कई अंशकालिक कोचों का कैंप 28 फरवरी को समाप्त हो गया है।
आर्चरी
आर्चरी में भी कुछ ऐसा ही समय चल रहा है। आर्चरी में लगभग 10 खिलाड़ी स्टेडियम प्रैक्टिस करने पहुंचते हैं। इस खेल में भी पिछले सत्र में अंशकालिक कोच की तैनाती थी। कई साल बाद स्टेडियम में आर्चरी कोच की तैनाती हुई थी। अब कैंप खत्म होने के बाद खिलाडिय़ों को परेशानी आ रही है। पिछले सत्र में कोच रही अनुपमा खिलाडिय़ों को कभी-कभी कोचिंग देने पहुंच जाती हैं, लेकिन फिलहाल आर्चरों को एक रेगुलर कोच नहीं होने कारण अच्छी कोचिंग नहीं मिल पा रही है।

कब होगी नियुक्ति
अंशकालिक कोचों की तैनाती पिछले वर्ष अगस्त में उत्तर प्रदेश सरकार ने की थी। इसके बाद इनका कैंप 28 फरवरी को हर साल समाप्त हो जाता है। इसके बाद दोबारा कोचों की नियुक्ति होती। ये नियुक्ति जुलाई अगस्त के बीच होती है। ऐसे में जो बच्चे गर्मियों में खेलों को ज्वाइन करना चाहते हैं, उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

"इस बार उम्मीद है कि बिना ट्रायल के ही कोचों की नियुक्ति कर दी जाए। जिससे खिलाडिय़ों को परेशानी नहीं भुगतनी पड़े। अब ये सरकार का ही फैसला होगा। जहां तक नियुक्ति की बात है अगर ऐसा नहीं होता तो हर साल की तरह जुलाई-अगस्त में ही नियुक्तियां हो पाएंगी."
एलआर पटेल, आरएसओ


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