पुलिस कैसे पहुंची मीनाक्षी थापा के कातिलों तक

2012-04-21T11:39:00+05:30

मुम्बई पुलिस से मदद मांगी तो निराशा हाथ लगी फिर शुरू हुई मेरी स्ट्रगल एक फौजी भाई निकल पड़ा बहन की तलाश में मीनाक्षी का भाई कैसे पहुंचा अमित और प्रीती तक उसने ऐसा क्या किया कि मुम्बई क्राइम ब्रांच उसकी मदद में लग गई आइए पढ़ते हैं मीनाक्षी की कहानी अमित की जुबानी

मैं एक फौजी हूं. अपने देश के सीमाओं की सुरक्षा करता हूंं. इस बार हादसा मेरे घर में हुआ था. फौजी होने के बाद भी अपनी बहन के लिए फिरौती की रकम देने पर मजबूर था. फिरौती की रकम का कुछ हिस्सा देने के बाद भी किडनैपर्स ने बहन से मेरी बात नहीं कराई तो शक हुआ और रुपए देने से इंकार कर दिया. इसके बाद मनीाक्षी का फोन स्विच ऑफ हो गया. अब मेरे के लिए यह परीक्षा की घड़ी थी.

देहरादून में मिली थी सूचना
मैं देहरादून में था. इसी दौरान मीनाक्षी के मोबाइल से भेजा गया मैसेज मिला. इसमें बहन को किडनैप कर लिए जाने की जानकारी थी. किडनैपर फिरौती की रकम मांगने के लिए मीनाक्षी के फोन का इस्तेमाल कर रहे थे. मीनाक्षी का फोन किडनैपर्स के पास होने से इतना तो तय था कि मीनाक्षी उनके चंगुल में है. मैं चाह कर कोई तत्काल रिस्क नहीं ले सकता था. मैंने बिना दिमाग लगाए किडनैपर के कहने पर मीनाक्षी के एकाउंट में 30 हजार रुपए जमा कर दिए. दूसरी किश्त के रूप में भी 30 हजार रुपए जमा किए. फिर मुझे 15 लाख रुपए देने के लिए एसएमएस आया. एक मिडिल क्लास फैमिली से विलांग करने वाले के लिए 15 लाख रुपए का इंतजाम करना कठिन था. मैं अपनी बहन को बदमाशों के चंगुल से बचाना चाहता था. फिर सोचा अपना घर बेच कर रुपए दे दूंगा. लेकिन, मैंने किडनैपर्स को रुपए देने से पहले मीनाक्षी से बात करवाने की शर्त रख दी. इस पर उनसे कोई रिस्पांस नहीं मिला. अब मुझे शक होने लगा था. बार-बार काल करने के बाद भी कोई रिस्पांस नहीं मिला. मेरे लिए यह पता करना कठिन था कि मीनाक्षी कहां है और फोन कहां से आ रहा है.
दर्ज कराई गुमशुदगी
मैंने अपनी बहन का पता लगाने के लिए कमर कस ली. ऑफिस में बात की और छुट्टी लेकर मुम्बई पहुंच गया. मीनाक्षी से फ्रेंड से मिला. लेकिन, कोई जानकारी नहीं मिली. मुम्बई के अंबोली पुलिस स्टेशन में 18 मार्च को मैंने अपनी बहन मीनाक्षी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस इस केस को सीरियसली नहीं ले रही थी. उसने कहा कि अपने दोस्तों के साथ कहीं गई होगी.
खुद शुरू किया सर्च ऑपरेशन
मीनाक्षी मेरी बहन थी. लिहाजा मैंने उसके बारे में पता लगाने की कोशिश खुद शुरू कर दी. मीनाक्षी का फेसबुक और ऑरकुट प्रोफाइल चेक करने पर पता लगा कि वह इलाहाबाद के रहने वाले अमित जायसवाल से जुड़ी है. अमित के प्रोफाइल से ही अमित की फोटो निकलवाई. प्रोफाइल पर सिक्योरिटी होने के कारण पूरी डिटेल नहीं मिल पा रही थी. मैंने अपने एक दोस्त की मदद ली. साइबर एक्सपर्ट दोस्त ने सिक्योरिटी तोड़ दी. फिर उसकी डिटेल मिली. मैंने मुम्बई पुलिस को बताया लेकिन फिर कोई एक्शन नहीं हुआ.
बाल ठाकरे से मिलने पहुंचा
मुम्बई में मेरा कोई जानने वाला नहीं था. पुलिस भी मदद नहीं कर रही थी. मैंने अपने दोस्तों से राय मांगी. उन्होंने कहा कि जाकर बाल ठाकरे से मिल लो. मैं किसी तरह बाल ठाकरे के यहां पहुंचा. उनसे डॉयरेक्ट तो मुलाकात नहीं हुई लेकिन उनका कामकाज देखने वाले व्यक्ति ने मेरी मदद की. मुझे कमिश्नर से मिलने के लिए भेजा. मैं मुम्बई के पुलिस कमिश्नर से मिलने पहुंचा. उन्हें पूरी बात बताई. कमिश्नर से मिलने के बाद इस केस की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई.
इलाहाबाद पता करने पहुंचा था
इसके बाद मैं मुम्बई क्राइम ब्रांच के उस ऑफिसर से मिला जिन्हें मीनाक्षी केस की जांच सौंपी गई थी. मैंने अपनी छानबीन के द्वारा मिले तथ्यों से उन्हें अवगत कराया. अब पुलिस ने मीनाक्षी के मोबाइल का कॉल डिटेल खंगाला तो पता चला कि अमित और मीनाक्षी के मोबाइल का लोकेशन इलाहाबाद में था. जांच के लिए कोई इलाहाबाद आने को तैयार नहीं था. मैंने अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी. फिर क्राइम ब्रांच के आफिसर से मिला. मार्च लास्ट में अमित का एडे्रस क्लीयर हुआ. मुम्बई क्राइम ब्रांच के साथ मैं इलाहाबाद पहुंचा. फाफामऊ लोकल पुलिस की मदद से अमित के पिता के पास हम पहुंचे.
प्रीति के घर भी पहुंचे थे
अमित के पिता ने मुम्बई क्राइम ब्रांच को इतना बताया कि वह किसी प्रीति एलविन नामक लडक़ी के साथ मुम्बई गया था. तभी से उसका पता नहीं चला. उन्होंने अमित के फैमिली के बारे में डिटेल पता किया. फिर अमित के पिता को लेकर प्रीति के घर पहुंचे. प्रीति के पिता नवीन सुरील से पूछताछ हुई. नवीन ने भी यही बताया कि वह दोनों मुम्बई में हैं लेकिन उनका दोनों से कोई टच नहीं है. इतना जरूर पता चला कि 14 मार्च को दोनों के साथ एक लडक़ी भी आई थी. वह लडक़ी कौन थी वे नहीं बता सके. उन्होंने बताया कि रात होने से पहले से ही तीनों चले गए.

टूट गई आस

हम लोग पूछताछ करके वापस चले गए. लेकिन, हमें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उन्होंने मेरी बहन की बेरहमी से कत्ल कर दिया होगा. क्योंकि, 14 मार्च के बाद भी मीनाक्षी के मोबाइल से काल आया था. ऐसे में लगा कि उसे कहीं छिपा दिए हैं और पैसे पाने के लिए फिर से कॉल करेंगे. इसके बाद मुम्बई क्राइम ब्रांच अमित और प्रीति की तलाश में उनके मुम्बई के पुराने एडे्रस पर पहुंची लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. मुझे ही नहीं क्राइम ब्रांच को भी यकीन हो गया था कि अमित के पकड़े गए बिना मीनाक्षी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलने वाली है. मुम्बई पुलिस को कामयाबी तभी मिली जब एक दिन मोबाइल ऑन हुआ. इसके बाद अमित और प्रीती को पकड़ लिया गया. फिर भी मुझे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि मेरी बहन अब इस दुनिया में नहीं है. यह मेरी छानबीन का बुरा अंत था. जब मुझे मर्डर की जानकारी मिली तो मैं टूट गया. मुझे इंसाफ चाहिए. मेरी लड़ाई अंतिम दम तक जारी रहेगी.
सिर का नहीं मिला कोई सुराग
मीनाक्षी के सिर की तलाश में लगी मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम को फ्राइडे को भी सफलता नहीं मिली. पुलिस को हालांकि अमित और प्रीती से पूछताछ के बाद कुछ लोकेशन का आइडिया मिला. इसके आधार पर सर्च ऑपरेशन के तहत पुलिस दोनों को लेकर संभावित स्थानों तक भी गई लेकिन सफलता उसकी झोली में नहीं आई.


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