स्टूडेंट्स बन रहे हथियार तस्करी का जरिया

2018-08-05T06:00:19+05:30

हथियारों की तस्करी में जोन के नौ जिलों में सबसे ऊपर है मेरठ का नाम

कॉलेज के हास्टलों से यूथ कर रहा है हथियारों की सप्लाई

मेरठ में पकड़ी गई हथियारों की फैक्ट्री से जुड़ा है मामला

MEERUT। हथियारों की तस्करी के लिए यूथ को चंद रूपयों का लालच देकर अवैध हथियारों की तस्करी के दलदल में उतारा जा रहा है। अभी तक जितने भी हथियार तस्कर पकड़े गए हैं, उसमें कई युवक कॉलेज के छात्र निकले हैं। एसएसपी राजेश कुमार पांडेय का कहना है कि हथियारों की तस्करी करने वाले स्कूल व कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को पैसे का लालच देकर इस धंधे में लगाते है।

मिलते 200 से 500 रूपये

अवैध हथियारों की तस्करी के धंधे में एक छात्र को एक हथियार को बताए ठिकाने पर पहुंचाने के लिए 200 से 500 रुपये बतौर कमीशन दिए जाते हैं। एक छात्र रोजाना तस्करी के जरिए करीब पांच से 10 हथियारों की को एक ठिकाने से दूसरे ठिकाने पर ले जाता है। जिससे वह आसानी से एक दिन में दो से तीन हजार रूपये कमा लेता है।

हॉस्टल से हथियारों की तस्करी

पुलिस की छानबीन में निकलकर आया है कि हथियारों के तस्कर स्कूल व कॉलेज के हास्टल में रहने वाले छात्रों को इसलिए चुनते है कि वह हथियारों को अपने हास्टल में आसानी से छिपा सकते हैं। पुलिस हास्टल में दबिश भी नहीं डालती है।

छात्र नेता ने दिए थे हथियार

अभी हाल में मेरठ कॉलेज व एनएएस कॉलेज में छात्रों में गुटबंदी को लेकर फायरिंग हुई थी। कॉलेज में लगे सीसीटीवी में भी छात्र नेता हथियार चलाते हुए कैद हो गए थे। पुलिस के सामने यह सबसे बड़ा सवाल था कि उनके पास यह हथियार कहां से आए। जब छात्रों से पूछताछ की तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए थे। पुलिस ने हथियारों की सप्लाई करने वाले पूरे गैंग का खुलासा किया था। यह हथियार एक छात्र नेता से खरीदे गए थे।

सफेदपोशों की सरपरस्ती

तीन दिन पहले पुलिस की प्रेसवार्ता में हथियार तस्करों ने बताया था कि सरधना के एक नेता के सरंक्षण में वह हथियारों की फैक्ट्री चला रहे थे। जैसे ही बदमाश नेता का नाम बताने वाला था तो एसएसपी ने उसे प्रेसवार्ता से बाहर भेज दिया। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध हथियार तस्करों को सफेदपोश लोगों का संरक्षण प्राप्त है.

मेरठ सबसे आगे

एडीजी प्रशांत कुमार भी मान चुके हैं कि अवैध हथियारों की फैक्ट्री के मामले में मेरठ में सबसे आगे है। अब यहां हथियार बनाए भी जाते हैं और यहां से सप्लाई भी किए जाते हैं।

हथियारों की फैक्ट्री चलाने वाले तस्करों की गिरफ्तारी के लिए टीम बना दी गई है। कॉलेज व स्कूलों के बाहर यूथ पर भी पैनी नजर रखी जा रही है।

राजेश कुमार पांडेय, एसएसपी

inextlive from Meerut News Desk


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