शहर में है सिर्फ एक मोबाइल टॉवर!

2018-11-14T06:00:27+05:30

- मोबाइल टॉवरों से प्रजनन क्षमता हो रही है कमजोर

- जानकारों के मुताबिक आबादी वाले क्षेत्र में नहीं होने चाहिए टॉवर

आगरा। शहर में सिर्फ एक ही मोबाइल टावर है। ये हम नहीं कह रहे हैं। ये कहना है एडीए का। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में बताया गया है कि एडीए के भवन अनुभाग द्वारा सिर्फ एक मोबाइल टॉवर लगाए जाने की अनुमति दी है। जबकि हकीकत ये है कि शहर में सैकड़ों की संख्या में मोबाइल टॉवर लगे हुए हैं।

एडीए को हो रही है राजस्व हानि

पथकर के अलावा एडीए की आय का जरिया ये भी है। एक मोबाइल टॉवर लगाए जाने पर एडीए एक लाख रुपये फीस वसूलता है। तभी अनुमति दी जाती है। लेकिन एडीए के मुताबिक शहर में केवल एक ही मोबाइल टॉवर है, इसका मतलब ये हैं कि राजस्व केवल एक मोबाइल टॉवर का ही एडीए के कोष में जमा हुआ है। सवाल ये है कि अन्य जो टॉवर लगे हैं, उनके विरुद्ध अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई है। आखिर ये किसके इशारे पर लगे हैं। अगर मनमाने तरीके से लगाए गए हैं तो अभी तक उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं अमल में लाई जा सकी है।

इससे होता है काफी नुकसान

मोबाइल टॉवर कहां पर लगना है, इसका विशेष ध्यान रखना होता है। क्योंकि मोबाइल टॉवर से जो रेडिएशन निकलते हैं, उससे प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है.

गौरैया हो गई गायब

मोबाइल टावर की ही ये देन है, जिससे गौरैया ही गायब हो गई है। जानकारों का मानना है कि गौरैया, गिद्ध, कौवे जैसे कई पक्षी रेडिएशन की भेंट चढ़ गए।

आबादी क्षेत्र में नहीं होने चाहिए

जानकारों का मानना है कि मोबाइल टावर आबादी के बीच में नहीं लगना चाहिए। क्योंकि इससे जो रेडिण्शन निकलता है वह काफी हानिकारक होता है। गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग इससे काफी प्रभावित होते हैं। दिल के मरीजों के साथ यह आमजन के लिए काफी हानिकारक होता है।

एडीए की है घोर लापरवाही

शहर में कहां पर टॉवर लगेंगे और कहां पर नहीं लगेंगे, इसके लिए एडीए जिम्मेदार है। लेकिन ये एडीए की ही घोर लापरवाही है, जो कि गली- गली में मोबाइल टॉवर लगे हुए हैं। जो कि आमजन के लिए काफी हानिकारक साबित हो रहा है, इसके साथ राजस्व की हानि हो रही है।

कुछ नहीं कहां जा सकता

इस संबंध में एडीए सचिव हरीराम से फोन पर बात की। उनसे पूछा कि शहर में एडीए की अनुमति के मुताबिक कितने मोबाइल टॉवर लगे हुए हैं, तो उन्होंने बताया कि ये कहना अभी मुश्किल है। जब उन्हें आरटीआई के तहत मांगी सूचना की जानकारी दी, तो उन्होंने यही कहा कि जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा.

inextlive from Agra News Desk


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.