ट्रैक से उतर गया चंद्रशेखर आजाद पार्क

2019-06-10T06:00:12+05:30

i reality check

-उखड़ रहा है सिंथेटिक जॉगिंग ट्रैक, सफाई व्यवस्था भी है बदहाल

नंबर गेम

136 एकड़ एरिया में फैला है चंद्रशेखर आजाद पार्क

22.14 करोड़ रुपए मिले थे पार्क के सुंदरीकरण के लिए

20 लाख रुपया तकरीबन हर महीना मिलता है टिकट से

08 हजार लोग औसतन रोज पहुंचते हैं वॉक करने यहां

15 हजार पहुंच जाती है आने वालों की संख्या छुट्टी के दिन

25 कर्मचारी किए गए हैं तैनात सफाई के लिए यहां

prayagraj@inext.co.in

PRAYAGRAJ: तीन साल पहले चंद्रशेखर आजाद पार्क का ब्यूटीफिकेशन हो रहा था। उस समय प्लान बना था कि कंपनी यहां लेजर लाइट शो होगा। म्यूजिकल फाउंटेन का नजारा लोगों को देखने को मिलेगा और ओपेन एयर थियेटर होगा। लेकिन फाइलों में बना यह प्लान फाइलों में ही रह गया। हालत यह है कि एक साल बाद तक पार्क फिर भी ठीक रहा, लेकिन अब यहां सिर्फ दु‌र्व्यवस्था ही नजर आती है। रविवार को दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने चंद्रशेखर आजाद पार्क का रियलिटी चेक किया तो यह हकीकत सामने आई

एक नजर में जॉगिंग ट्रैक

2015 में हुई थी इसकी शुरुआत

05 करोड़ की लागत आई थी

03 किमी है इसकी लंबाई

10 साल बताई गई थी उम्र

नहीं हुआ मेंटीनेंस

करीब पांच करोड़ रुपए खर्च करके आजाद पार्क में सिंथेटिक जॉगिंग ट्रैक बना था। इसकी कुल लंबाई तीन किलोमीटर है। तब बताया गया था कि इसकी लाइफ दस साल रहेगी। अगर मेंटीनेंस पर ध्यान दिया गया तो यह और बढ़ सकती है, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। लगने के कुछ महीनों के बाद ही जॉगिंग ट्रैक जगह-जगह से उखड़ने लगा। वजह बताई गई कि स्पो‌र्ट्स शूज के अलावा अन्य शूज पहनकर लोग इस पर चलते हैं, इसलिए ऐसा हो रहा है। इस पर रोक लगाने का आदेश हुआ, पर हालात जस के तस हैं।

जॉगिंग ट्रैक पर वॉक करने से यह होता है फायदा

-सड़क या हार्ड सरफेस पर चलने से घुटनों पर बैड इफेक्ट पड़ता है।

-सिंथेटिक जॉगिंग ट्रैक चलने से जर्क कम लगता है।

-इससे देर तक वॉक करने पर भी घुटने सलामत रहते हैं।

बॉक्स-1

जगह-जगह दिखाई दिया गंदगी का ढेर

यहां सफाई दिन में केवल एक बार सुबह नौ से शाम चार बजे के बीच में। शाम चार बजे के बाद पार्क में आने वाले लोग जो गंदगी छोड़ कर जाते हैं, वह रात भर यहीं पड़ी रहती है।

बॉक्स-2

होली के बाद से सूखा पड़ा है झील

म्यूजिकल फाउंटेन शो और लेजर लाइट शो के लिए एक बड़ी झील बनी है। कभी यह सेंटर ऑफ अट्रैक्शन थी। लेकिन पिछले करीब दो महीने से झील पूरी तरह सूख चुकी है।

यह कहते हैं वॉकर्स

भीषण गर्मी पड़ रही है। इस मौसम में पूरे ट्रैक पर पानी का छिड़काव होना चाहिए। लेकिन कुछ स्थान पर ही पानी का छिड़काव हो रहा है। यही वजह है कि सिंथेटिक जॉगिंग ट्रैक उखड़ रहा है।

-हरिश्चंद्र त्रिपाठी

गेट नंबर छह के आगे जहां ओपेन एयर जिम बना है, उसी से आगे पार्क में बैठ कर लोग योगा करते हैं। मशीन के पैकिंग पेपर को पार्क में ही फेंक दिया गया है। यह हवा से उड़ कर लोगों के पास पहुंच जाता है।

-विजय वैश्य

पार्क में दो हैंडपंप थे, जो खराब पड़े हुए हैं। प्यास लगने पर लोगों को मेन गेट के पास लगे राधाजी प्याऊ तक जाना पड़ता है। पानी की व्यवस्था काफी खराब है।

-बसंत लाल आजाद

कंपनी गार्डन में हम लोग हर रोज आते हैं। सूखते हुए पौधों को देख कर बहुत दुख होता है। पब्लिक से जब पैसा लिया जा रहा है, तो फिर खर्च करने में लापरवाही क्यों?

-सतीश चंद्र केसरवानी

ब्यूटीफिकेशन केबाद एक साल तक व्यवस्था ठीक थी। अब चंद्रशेखर आजाद पार्क की रौनक कुछ फीकी हो गई है। सूखे के साथ ही गंदगी व कचरे का ढेर दिखाई देता है।

रविंद्र जायसवाल

करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी चंद्रशेखर आजाद पार्क के ब्यूटीफिकेशन में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है। पार्क को टूरिस्ट प्लेस बनाया जाना था, जो आज तक नहीं बन सका है।

-दिनेश सिंह

inextlive from Allahabad News Desk


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