अब निगमों की दुकानें ठेके व पार्किंग भी टैक्स के दायरे में

2019-06-13T06:00:34+05:30

देहरादून, शासन ने राजस्व बढ़ाने के लिए सभी विभागों को अपनी कलेक्शन प्रोसेज को मजबूत करने के कहा है। इसके तहत विभागों को सभी प्रकार के अनुबंधों पर स्टांप शुल्क लेने को कहा गया है। शासन ने यह भी कहा है कि पुराने मामलों में जहां स्टांप शुल्क नहीं लिया गया है, उन पर भी उचित कार्रवाई की जाए। यह भी चेतावनी दी है गई कि आदेशों के पालन में लापरवाही बरती गई तो कार्रवाई की जाएगी।

हर माह 10 तारीख को रिपोर्ट

शासन राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रहा है। नए सोर्सेज की तलाश जारी है। विभागों के जरिये राजस्व वसूला जा रहा है। लेकिन कुछ ऐसे मद भी हैं, जिनसे राजस्व कलेक्शन किया जा सकता है। इसमें स्टांप शुल्क भी शामिल है। अब तक भवन व जमीनों से लिए जाने वाले स्टांप शुल्क के बाद शासन ने यह स्पष्ट किया है कि निकायों व संस्थाओं द्वारा बनाई गई दुकानों को बेचने, लीज, ठेके व कॉन्ट्रेक्ट पर देने, पार्किंग ठेके, विभिन्न प्रकार के कार्यो के आवंटन पर भी स्टांप शुल्क लिए जाने का प्रावधान है। वित्त सचिव अमित नेगी के अनुसार जिन विभागों की किसी कार्यवाही में स्टांप शुल्क लिए जाने का प्रावधान है, उसे लिया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विभागों का उदाहरण देते हुए सभी विभागों से नियमानुसार स्टांप शुल्क का संग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। कहा, सभी विभागों को हर महीने की 10 तारीख तक मासिक रिपोर्ट स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को उपलब्ध करानी होगी।

inextlive from Dehradun News Desk


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