शिक्षक भर्ती में धांधली में दो अधिकारियों पर गिरी गाज

2018-09-09T09:55:05+05:30

प्राथमिक स्कूलों में 68500 शिक्षकों की भर्ती में अनियमितताएं उजागर होने पर बैकफुट पर आई सरकार ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की है

- सचिव परीक्षा नियामक सस्पेंड, सचिव बेसिक शिक्षा व रजिस्ट्रार हटाए गए
-शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं पर शासन की बड़ी कार्रवाई

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW: प्राथमिक स्कूलों में 68500 शिक्षकों की भर्ती में अनियमितताएं उजागर होने पर बैकफुट पर आई सरकार ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की है. परीक्षा नियामक अधिकारी को सस्पेंड करने के साथ-साथ रजिस्ट्रार विभागीय परीक्षाएं व सचिव बेसिक शिक्षा को पद से हटा दिया गया है. इतना ही नहीं, प्रमुख सचिव चीनी, गन्ना विकास की अध्यक्षता में गठित कमेटी को पूरे मामले की जांच सौंप दी गई है.

शुरू हुआ डैमेज कंट्रोल
शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा आयोजित करने के लिए जिम्मेदार संस्था परीक्षा नियामक प्राधिकारी की सचिव डॉ. सुत्ता सिंह को सीएम के निर्देश पर सस्पेंड करते हुए उनके खिलाफ अनुशासनिक जांच शुरू कर दी गई है. वहीं सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद के पद पर लंबे समय से जमे संजय सिन्हा से यह कुर्सी छीन ली गई है. रजिस्ट्रार, विभागीय परीक्षाएं जीवेंद्र सिंह ऐरी को हटाकर उन्हें कौशांबी के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर भेजा गया है. शिक्षक भर्ती में बरती गईं अनियमितताओं की जांच के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रमुख सचिव चीनी एवं गन्ना विकास संजय आर. भूसरेड्डी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है.

सात दिनों में देनी होगी जांच रिपोर्ट
सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक वेदपति मिश्रा और बेसिक शिक्षा निदेशक सवर्ेंद्र विक्रम बहादुर सिंह जांच समिति के सदस्य बनाये गए हैं. समिति को मामले की गहनता से जांच कर दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सात दिनों में अपनी रिपोर्ट शासन को देनी होगी. बेसिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव डा. प्रभात कुमार ने बताया कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ रिपोर्ट आने पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

 

इन अफसरों की हुई तैनाती
सस्पेंड किये गए और हटाए गए अधिकारियों की जगह नए अफसरों की तैनाती की गई है. लखनऊ में अपर निदेशक बेसिक शिक्षा रहीं रूबी सिंह को सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद के पद पर इलाहाबाद भेजा गया है. बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात ललिता प्रदीप को अपर निदेशक बेसिक शिक्षा बनाया गया है. मेरठ मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी को इलाहाबाद में निदेशक राज्य विज्ञान संस्थान के साथ सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी के पद पर तैनात किया गया है. लखनऊ में सर्व शिक्षा अभियान के संयुक्त निदेशक अजय कुमार को रजिस्ट्रार, विभागीय परीक्षाएं, इलाहाबाद के पद पर तैनाती दी गई है. उनकी जगह जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान लखनऊ के प्राचार्य पवन सचान को भेजा गया है. उप निदेशक (शिविर) माध्यमिक शिक्षा निदेशक कार्यालय भगवती सिंह को बेसिक शिक्षा विभाग के कायरें के लिए शासन से सम्बद्ध किया गया है. सुत्ता सिंह सस्पेंशन अवधि में बेसिक शिक्षा निदेशक के लखनऊ स्थित कार्यालय से संबद्ध रहेंगी.

हाईकोर्ट को देना है जवाब
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में दायर रिट सोनिका देवी बनाम उत्तर प्रदेश में कहा गया है कि मूल्यांकन के समय अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका ही बदल दी गई. सरकार की ओर से महाधिवक्ता को हाईकोर्ट को यह आश्वासन देना पड़ा है कि शासन स्तर पर इस मामले की जांच करायी जाएगी और इसमें जो व्यक्ति दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

 

यह था मामला
सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम में विवाद शुरू होने के बाद कापियों के मूल्यांकन में गड़बडि़यों ने शासन की भी नींद उड़ा दी. बीते शनिवार को भी कोर्ट के निर्देश पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय द्वारा अभ्यर्थियों को कापियों के स्कैन प्रति लेने दी गई. जिसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के रिजल्ट में मिले और कापियों में मिले में बड़े अंतर देखने को मिले. स्कैन कॉपी व परिणाम में 60 अंकों तक का अंतर पाया गया. भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में 23 ऐसे अभ्यर्थियों की भी सूची हासिल हुई जिन्हें परीक्षा में फेल होने के बावजूद उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया. मामला उजागर होने पर इन सभी की नियुक्तियां बेसिक शिक्षा परिषद के जरिये से रोकनी पड़ीं. दरअसल, परिषदीय स्कूलों की सहायक अध्यापक भर्ती 2018 की लिखित परीक्षा का जारी होने पर 41556 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए थे. यह परिणाम सामान्य व पिछड़ा वर्ग के लिए 45 और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए 40 फीसद उत्तीर्ण प्रतिशत के आधार पर जारी किया गया था. इसमें महज 38.52 फीसद अभ्यर्थी ही उत्तीर्ण हो सके. परीक्षा परीक्षा में कुल एक लाख, 25 हजार 746 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. लिखित परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद नियुक्ति के लिए 41556 पदों के आधार पर पहली सूची जारी हुई थी. जिसमें 34660 अभ्यर्थियों को शामिल किया गया. इसके बाद लिखित परीक्षा में सफल 6136 अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर होने का मामला तूल पकड़ा तो इनको भी चयन सूची में शामिल किया गया. इसमें भर्ती के कुल पद यानी 68500 को आधार बनाया गया और 6127 की दूसरी चयन सूची जारी की गई. यहीं से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवादों का दौर शुरू हो गया.

कब क्या हुआ
28 अक्टूबर 2017 : परिषद से शिक्षक भर्ती का पाठ्यक्रम जारी.

09 जनवरी 2018 : सहायक अध्यापक भर्ती का शासनादेश जारी.

25 जनवरी : भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू.

09 फरवरी : आवेदन लेने की अंतिम तारीख.

12 मार्च : लिखित परीक्षा की तारीख जो टाल दी गई.

मई : टीईटी में अंक बढ़ने से सफल अभ्यर्थियों से दोबारा आवेदन.

21 मई : शासन ने उत्तीर्ण प्रतिशत अंकों में किया बदलाव.

27 मई : लिखित परीक्षा कराई गई.

06 जून : पहली उत्तर कुंजी जारी.

18 जून : संशोधित उत्तर कुंजी जारी.

08 अगस्त : उत्तीर्ण प्रतिशत के अंक बदले, पहले शासनादेश के अंक मान्य.

13 अगस्त : परीक्षा परिणाम जारी

फैक्ट फाइल

1.25 लाख अभ्यर्थियों ने किया था शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन

41556 अभ्यर्थियों को ही मिली थी सफलता

2500 अभ्यर्थियों ने शुल्क जमा करके कापियां देखने की इच्छा जताई

40796 अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन फिल की जिला वरीयता

34660 अभ्यर्थी पहली सूची में चयनित किये गये

6127 अभ्यर्थी दूसरी सूची में चयनित किये गये

09 अभ्यर्थियों को अचयनित घोषित किया गया


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