कौन है जिम्मेदार तय न कर सके सरकार

2018-12-09T06:00:59+05:30

-शासन ने लगाई फटकार, जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई के दिए निर्देश

-कई सालों से पेंडिंग पड़ा है स्टेडियम का काम

-यूनिवर्सिटी ने अब तक नहीं लिया है कोई एक्शन

GORAKHPUR: गोरखपुर यूनिवर्सिटी और लापरवाही का चोली-दामन का साथ है। यही वजह है कि यहां परियोजनाएं शुरू तो होती हैं, लेकिन उन्हें पूरा होने में बरसों लग जाते हैं। कुछ ऐसा ही यूनिवर्सिटी कैंपस में बन रहे स्टेडियम के साथ हुआ है, जहां तय डेडलाइन पूरा होने तक महज 60 फीसदी ही काम हो पाया है। शासन के फंड का इस्तेमाल करने के बाद भी काम में सुस्ती और लापरवाही इस कदर हुई कि मामले में शासन को दखल देनी पड़ गई। फंड खर्च होने के बाद भी काम अधूरा रहने पर शासन ने न सिर्फ यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों को फटकार लगाई, बल्कि काम न पूरा होने के लिए कौन जिम्मेदार है, यह तय कर उन्होंने रिपोर्ट भी तलब की है। इतना ही नहीं उन्होंने कार्यदायी संस्था पर भी नकेल कसते हुए उन्हें यूनिवर्सिटी पहुंचकर फिजिकल इंस्पेक्शन कराने के निर्देश्ा दिए हैं।

एक लेटर भी नहीं किया जारी

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में अब तक न तो स्टेडियम का काम पूरा हो सका है और न ही जिम्मेदार अब तक कोई एक्शन ही ले सके हैं। हालत यह है कि यूनिवर्सिटी के जिम्मेदार एक नोटिस तक इशु करने से डर रहे थे, जिसकी वजह से कार्यदायी संस्था के हौसले बुलंद है और वह एक के बाद एक काम फंसाती चली जा रही है। मगर शासन को मामले की जानकारी होने के बाद उन्होंने दोनों के पेंच कसे। कार्यदायी संस्था की इस लापरवाही और जिम्मेदारों के रवैये को देखते हुए शासन में इसकी समीक्षा की जा रही है।

90 परसेंट दे िदया पेमेंट

डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी में एक ही फर्म को सभी विकास कार्य मिल जाने से डेवलपमेंट ठप पड़ गए हैं। विकास सिर्फ कागजों में ही हो रहा है और उसी में निर्माण कार्य चल रहा है। हालत यह है कि यूनिवर्सिटी पिछले पांच साल से शुरू हुए काम पूरा होने के बाद हैंडओवर का इंतजार कर रही है, लेकिन अब तक उनका कोई एक प्रोजेक्ट कंप्लीट होकर हैंडओवर नहीं हो सका है, जबकि कार्यदायी संस्था ने जिम्मेदारों से 90 परसेंट से ज्यादा पेमेंट ले लिया है। काफी इंतजार के बाद भी काम पूरा न होने पर जिम्मेदारों की अब आंख खुली है और उन्होंने कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है।

कागजों में कमजोर है यूनिवर्सिटी

यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों ने अब तक कार्यदायी संस्था पर न तो कोई दबाव ही बनाया है और न ही उसके खिलाफ कोई सख्त कदम उठाए हैं। ऐसा इसलिए कि यूनिवर्सिटी कागजी कार्रवाई में काफी कमजोर होने की वजह से कोई भी कदम नहीं उठा पा रही है। सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि यूनिवर्सिटी ने इन पांचों काम के लिए किसी भी तरह का एग्रीमेंट नहीं कराया है। यानि वह इस बात का दावा नहीं कर सकते हैं कि कार्यदायी संस्था अगर निर्धारित समयावधि में कोई काम पूरा नहीं करती है, तो उनके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।

वर्जन

शासन ने कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों को यूनिवर्सिटी पहुंचकर फिजिकल इंस्पेक्शन कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं कोई समस्या हो उसको भी रखने के लिए कहा है, लेकिन अब तक संस्था की ओर से कोई भी नहीं पहुंचा है। इस संबंध में शासन को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जाएगा।

-सुरेश चंद्र शर्मा, रजिस्ट्रार, गोरखपुर यूनिवर्सिटी

inextlive from Gorakhpur News Desk


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