मेरठ कहीं 5 घंटे तो कहीं भोले की मर्जी तक

2018-08-09T11:23:26+05:30

हाइवे पर देर रात तक रहा डाक कांवड़ का हुजूम, डीजे पर गूंजते रहे भजन

कम से कम समय में डाक कांवड़ लाने की रहती है होड़

MEERUT : शिवरात्रि के मौके पर भोले की भक्ति में हर कोई शिद्दत से जुड़ा है। इनमें कोई हरिद्वार से जल लेकर नंगे पैर कांवड़ लेकर आ रहा है तो कोई निर्धारित समय में डाक कांवड़ लाकर भोले को प्रसन्न करना चाहता है। बुधवार को कांवड़ मार्ग पर सबसे ज्यादा डाक कांवड़ों की गहमागहमी देखी गई। डाक कांवड़ की सबसे खास बात यह है कि कुछ डाक कांवड़ों ने कम से कम समय में गंगाजल लाकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करना का संकल्प लिया था। तो कुछ कांवडि़यों ने भोले की मर्जी तक ही इसको सीमित कर लिया है।

 

कम समय की होड़

कम से कम समय में डाक कांवड़ लाने की होड़ रहती हैं। कुछ कांवडि़ए हरिद्वार से जल लाते हैं तो कुछ गंगोत्री से निर्धारित समय में जल लाकर भोलेबाबा का जलाभिषेक करने का संकल्प करते हैं।

 

कम समय तो ज्यादा कांवड़िये

डाक कांवड़ लेकर आ रहे शोभित बताते हैं कि जितने कम समय में डाक कांवड़ लानी होती हैं, उतने ज्यादा कांवडि़ए साथ में होते हैं.ताकि गंगाजल लेकर लगातार दौड़ लगाने में मुश्किल न आए, और निर्धारित समय में शिवालय तक पहुंच सकें।

 

सिर्फ 5 से 6 घंटे

सबसे ज्यादा डाक कांवड़ दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से चलती हैं। इनमें कांवडि़ए अपने क्षेत्र के शिवालय में एक निर्धारित समय में पहुंचने का संकल्प लेते हैं। दिल्ली के वजीराबाद से डाक कांवड़ लेकर आए विवेक बताते हैं उनकी टीम में करीब 40 सदस्य हैं जो कांवड़ लेकर आए हैं। उन्होंने छह घंटे में वापस दिल्ली पहुंचकर जलाभिषेक करने का प्रण लिया है।

 

बढ़ गई वाहनों की संख्या

बुधवार को हाइवे और कांवड़ मार्ग पर डाक कांवड़ के आने से वाहनों की संख्या बढ़ गई, जिससे कुछ जगहों पर ट्रैफिक बाधित रहा। हालांकि पुलिस की मुस्तैदी से यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही।

 

निश्चित समय की मनौती

पूर्वी दिल्ली से डाक कांवड़ ला रहे है विक्रम सिंह ने बताया कि अक्सर कांवडि़यों में कम से कम समय में कांवड़ लाने की होड़ रहती हैं। जिससे कई बार मुश्किलें भी सामने आ जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी यातायात को लेकर आती हैं। जाम से जूझने के कारण अक्सर विवाद हो जाता है।

 

30 घंटे का संकल्प

हरिद्वार से अलवर तक डाक कांवड़ लेकर जा रहे रामशंकर सिसौदिया ने बताया कि उन्होंने साथियों के साथ मिलकर 30 घंटे में पहुंचकर जलाभिषेक करने का संकल्प किया है।


भोले की मर्जी

डाक कांवड़ भी कई प्रकार की हो गई है। इनमें कुछ तूफानी डाक कांवड़ के कांवडि़ए कम से कम समय में गंतव्य तक पहुंचने का संकल्प करते हैं। तो कुछ डाक कांवड़ पर भोले की मर्जी लिखा होता है। इस बार तकरीबन 60 फीसदी वाहनों पर भोले की मर्जी लिखा मिला।


नहीं रुकता है गंगाजल

दरअसल, डाक कांवड़ में निर्धारित समय में पहुंचने के लिए एक कांवडि़ए को लगातार जल लेकर दौड़ लगानी होती है। कुछ दूरी के बाद दूसरा कांवडि़या जल लेकर पहले वाले को रिलीव कर दौड़ लगाता है। मसलन डाक कांवड़ कुछ रिले रेस सरीखी ही होती है।

inextlive from Meerut News Desk


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