जाने से पहले फिर मिलने का संकल्प

2019-02-10T06:00:35+05:30

रविवार को होगी संगम तट पर अंतिम शाही स्नान

संगम की रेती पर चल रहे दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव कुंभ मेला में सनातन धर्म के केन्द्र बिन्दु अखाड़ों की विदाई की बेला आ गई है। मेला के तीसरे प्रमुख व अंतिम शाही स्नान पर्व बसंत पंचमी दस फरवरी को मनाई जाएगी। जिसमें देश के सभी तेरह अखाड़ों के साथ ही किन्नर अखाड़ा भी शाही स्नान करेगा। स्नान के बाद मेला एरिया की अपनी- अपनी छावनी से निकलकर नागा संन्यासी, संत- महात्मा व महामंडलेश्वर अपने गंतव्य की ओर चले जाएंगे। जाने से पहले शनिवार को प्रत्येक अखाड़े में एक- दूसरे को स्नेह निमंत्रण और छह वर्ष बाद प्रयागराज में ही आयोजित होने वाले कुंभ मेला में फिर से मिलने का संकल्प भी दिया गया.

हरिद्वार और प्रयागराज का दिया न्यौता

मेला के दौरान जहां पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर उत्तराखंड के सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मेला एरिया में प्रत्येक अखाड़े में जाकर संत- महात्माओं को हरिद्वार में वर्ष 2022 में आयोजित होने वाले कुंभ मेला का निमंत्रण दिया था। उसी क्त्रम को आगे बढ़ाते हुए शनिवार को सेक्टर सोलह में स्थित अखाड़ों में भी संत- महात्माओं ने एक- दूसरे को हरिद्वार कुंभ में शाही स्नान पवरें तक साथ- साथ रहने का न्यौता दिया। इतना ही नहीं प्रयागराज में वर्ष 2025 में कुंभ मेला का आयोजन होना है। उसके लिए भी श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी, श्री पंचायती अखाड़ा अटल व श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के शिविरों में भी एक- दूसरे को तिलक लगाकर छह वर्ष बाद आने का स्नेह निमंत्रण दिया गया.

स्नान बाद शुरू होगी वापसी

शनिवार की रात भर प्रत्येक अखाड़ों में बसंत पंचमी शाही स्नान पर्व की तैयारियां की गई। रविवार को मेला प्राधिकरण की ओर से जारी अखाड़ों के स्नान क्त्रम के अनुसार एक- एक कर अखाड़े शाही स्नान के लिए संगम जाएंगे। श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के अध्यक्ष श्रीमहंत रवीन्द्र पुरी ने बताया कि कुंभ में शाही स्नान पवरें के बाद परंपरा का निवर्हन करते हुए संत- महात्मा, नागा संन्यासी अपने- अपने मठ- मंदिरों की ओर वापस लौटने लगेंगे। क्योंकि अखाड़ों में शाही स्नान के अलावा कोई अन्य स्नान नहीं किया जाता है। चौदह फरवरी तक प्रत्येक छावनी पूरी तरह से खाली हो जाएगी.

कुंभ का वैभव अखाड़ों की सनातन परंपरा से जुड़ा हुआ है। हरिद्वार हो या प्रयागराज या फिर नासिक का कुंभ। अखाड़े अपनी- अपनी पेशवाई निकालने के बाद अपनी छावनी में पहुंच जाते है। जब शाही स्नान का क्त्रम समाप्त हो जाता है तो उसके तीन दिनों के भीतर अपने स्थान की ओर लौट जाते हैं। परंपरा के अनुसार जाने से पहले एक- दूसरे को अगले कुंभ का निमंत्रण दिया जाता है.

श्रीमहंत नरेन्द्र गिरी,

अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद

inextlive from Allahabad News Desk


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