तीन पीढि़यों का गवाह है गोलघर का बरगद पेड़

2019-04-28T06:00:32+05:30

-दर्शकों के साथ ही स्थानीय लोगों का भी है गहरा लगाव

PATNA: पटना जैसे व्यस्त शहर में तीन पीढि़यों का गवाह रहा है गोलघर का बरगद का पेड़। यह विशाल पेड़ धार्मिक आस्था का भी प्रतीक है। इसके निशान चबूतरे पर मौजूद हैं। यह गोलघर जैसे ऐतिहासिक धरोहर के साथ होने के अलावा स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए खास है। कई स्थानीय नागरिक जो गोलघर के पास में रहते हैं वे इस पेड़ की न केवल पूजा करते हैं बल्कि यहां सुकून के पल भी बिताते हैं। गोलघर कैंपस के अंदर होने से यह पूरी तरह से सुरक्षित है। पटना में ऐसे पेड़ और भी हैं लेकिन खास बात यह है कि यह पेड़ संरक्षित क्षेत्र में होने के कारण शहरीकरण की दौड़ से अप्रभावित है।

नाग की होती थी पूजा

गोलघर आने वाले आस-पास के बुजुर्ग लोग बताते हैं कि बरगद का यह पेड़ वे अपने बचपन के समय से देखते आ रहे है। स्थानीय नागरिक विजय सिंह का कहना है कि यह पेड़ करीब 60 वर्ष पुराना है। इस पेड़ की आज भी बड़ी महत्ता है क्योंकि इस पेड़ के पास ही शिव मंदिर हुआ करता था। लेकिन कैंपस के आधुनिकीकरण और तत्कालीन अधिकारियों द्वारा मंदिर हटाने के निर्णय के कारण यह मंदिर अब नहीं है। उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है और देखा भी गया है कि यहां पर नाग देवता का वास स्थान था। इसलिए स्थानीय लोग इसे एक पेड़ मात्र नहीं मानते हैं।

वट सावित्री की होती है पूजा

पहले और आज भी इस विशाल पेड़ की धार्मिक महिमा यथावत है। महिलाएं यहां वट सावित्री की पूजा के दौरान धागा बांधने के लिए इस पेड़ के पास ही आती हैं। हालांकि इस इलाके में कई और बरगद के पेड़ हैं। लेकिन इस पेड़ के प्राचीन होने के कारण लोग इसके प्रति विशेष आस्था रखते हैं।

पर्यटकों के लिए आरामगाह

यह पेड़ काफी छायेदार है। यही वजह है कि यहां इन दिनों भीषण गर्मी में गोलघर विजिट करने वाले पर्यटक इस पेड़ के नीचे आराम करते हैं। उन्हें इस पेड़ के नीचे बैठते ही शीतल हवा का अहसास होता है। यह गुड फील गोलघर के कैंपस में घूमने के आनंद को दोगुना कर देता है।

inextlive from Patna News Desk


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