जियोमैपिंग से होगा आग की घटनाओं पर वार

2019-05-09T09:17:28+05:30

उत्तर प्रदेश में आग से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए फायर डिपार्टमेंट ने नया तरीका निकाला है। इसके लिए विभाग ने कुछ इलाकों को चिन्हित किया जिसमें आग से निपटने के संसाधन बढ़ाए जाएंगे।

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LUCKNOW : प्रदेश में आग से होने वाले नुकसान को कम करने के लिये अब फायर डिपार्टमेंट ने कवायद शुरू कर दी है। गर्मी के मौसम में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लगने वाली आग को समय रहते काबू करने के लिये प्रभावित क्षेत्रों को जियो मैपिंग के जरिये चिन्हित किया जा रहा है। सर्वाधिक आग

प्रभावित क्षेत्रों में संसाधन बढ़ाकर आग के खतरों को कम किया जा सकेगा।

प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ेंगे संसाधन

गर्मी का मौसम आते ही प्रदेश में अग्निकांड का खतरा मंडराने लगता है। शहरों व कस्बों के साथ ही ग्रामीण इलाकों में फसलों में भी आग से हर साल भारी नुकसान होता है। इन अग्निकांड को रोकने के लिये प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में मौजूद फायर टेंडर्स कोशिश करती हैं लेकिन, बावजूद इसके नुकसान का आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है। आग के इसी खतरे और उससे होते नुकसान को देखते हुए फायर डिपार्टमेंट आग प्रभावित क्षेत्रों की जियो मैपिंग शुरू की है। बताया गया कि मैपिंग के जरिए आग से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों को चिन्हित किया जाएगा। जिसके बाद अगर संबंधित क्षेत्र में फायर स्टेशन मौजूद नहीं है तो वहां नया फायर स्टेशन खोलने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा जबकि, अगर फायर स्टेशन मौजूद है तो वहां संसाधनों को बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस कवायद से आग के खतरे और उससे होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

144 फायर स्टेशन

वर्तमान में प्रदेश के 61 जिलों में आग से निपटने के लिये 144 फायर स्टेशन मौजूद हैं। इसके साथ ही इन फायर स्टेशनों में 5536 फायरकर्मी व अधिकारी तैनात हैं। आग पर काबू पाने के लिये फिलवक्त 1082 फायर फाइटिंग मशीन्स व फायर टेंडर उपलब्ध हैं।



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