सेटेलाइट से जुड़े ट्रेन के इंजन इसरो दे रहा रियल टाइम लोकेशन

2019-01-19T11:29:07+05:30

रेलवे इसरो के साथ मिलकर पैसेंजर्स को सटीक जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने लगा है

-रेलवे के कंट्रोल रूम को इसरो से मिलने लगी इंफॉर्मेशन

- सेटेलाइट से जुड़े ट्रेन के इंजन, पैसेंजर्स की परेशानी हुई कम

varanasi@inext.co.in
VARANASI:
मौसम बदलते ही एनटीईएस से ट्रेंस गायब हो जाती हैं. ट्रेंस का स्टेटस न मिलने के कारण लोग घंटों पहले ही स्टेशन पहुंच जाते हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. रेलवे इसरो के साथ मिलकर पैसेंजर्स को सटीक जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने लगा है. दरअसल, रेलवे ने अपने इंजन को इसरो के सेटेलाइट से जोड़ दिया है. जिससे ट्रेन का स्टेटस और उसके अराइवल और डिपार्चर की टाइमिंग अपने आप दर्ज होना आसान हो गया है. इससे एनटीईएस पर ट्रेंस का अपडेशन प्रॉपर होने लगा है.

रियल टाइम पता चलना हुआ आसान
रेलवे ने नए साल में पैसेंजर्स के लिए खास शुरुआत की है. ट्रेन के आवागमन की सटीक जानकारी प्राप्त करने और कंट्रोल चार्ट में दर्ज करने के लिए इंडियन सेटेलाइट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) के उपग्रह आधारित रियल टाइम ट्रेन इंफार्मेशन सिस्टम (आरटीआईएस) से स्वत: उपयोग किया जाने लगा है. ऑफिसर्स के मुताबिक इस कदम का मकसद ट्रेंस के ऑपरेशन की सटीक लोकेशन में सुधार लाना है. उन्होंने बताया कि इंजन में आरटीआईएस डिवाइस से इसरो द्वारा डेवलप गगन जियो पोजीशनिंग सिस्टम का यूज करके ट्रेंस की स्पीड और लोकेशन के बारे में पता लगाया जाता है.

बनारस से होकर गुजर रही ट्रेंस
रेलवे ने ये डिवाइस कई ट्रेंस में आठ जनवरी से इनबिल्ड कर दिया है. इनमें श्रीमाता वैष्णो देवी-कटरा बांद्रा टर्मिनस, नई दिल्ली-पटना, नई दिल्ली-अमृतसर और दिल्ली-जम्मू रूट की कई ट्रेंस शामिल हैं. इनमें नई दिल्ली-अमृतसर बनारस से होकर जाती है तो नई दिल्ली-पटना पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन से गुजरती है. खास बात यह कि नये सिस्टम से रेलवे अपने ट्रेंस ऑपरेशन नेटवर्क को आधुनिक बनाने में सफल साबित होगा. कारण कि प्रॉपर इंफार्मेशन न देने से रेलवे की किरकिरी हो रही है.

खत्म हुआ मैनुअल हस्तक्षेप
डिवाइस के थ्रू ट्रेन के आवागमन (आगमन/प्रस्थान/तय की गई दूरी/ ठहराव और सेक्शन के बीच की सूचना) की ताजा जानकारी इसरो के एस-बैंड मोबाइल सेटेलाइट सर्विस (एमएसएस) का उपयोग करके सीआरआईएस डाटा सेंटर में सेंट्रल लोकेशन सर्वर को भेजती है. सीएलएस में प्रोसेसिंग के बाद इस सूचना को कंट्रोल ऑफिस एप्लीकेशन (सीओए) सिस्टम को भेजा जाता है, जिससे बिना किसी मैनुअल ब्रेक के कंट्रोल चार्ट अपने आप अपडेट हो जा रहा है. जबकि पहले ट्रेन के लोकेशन से जुड़ा इंफार्मेशन मैनुअली अपडेट किया जाता था.


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.