ट्रिपल तलाक पर अध्यादेश को लेकर महिलाओं ने जाहिर की खुशी

2018-09-20T06:01:04+05:30

- महिलाओं की समस्या को ध्यान में रखकर विपक्ष को भी ट्रिपल तलाक बिल पर देनी चाहिए साथ

BAREILLY :

तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए सरकार ने वेडनसडे को अध्यादेश का सहारा लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। ट्रिपल तलाक बिल को लेकर मोदी सरकार के फैसले का महिलाओं ने स्वागत किया है। वहीं मौलानाओं ने इस पर असहमति जाहिर की है। तीन तलाक विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है, यह बिल राज्यसभा में लंबित है। राज्यसभा में कांग्रेस के अड़ंगे के बाद ये बिल लंबित हो गया था। सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को राहत देने के लिए अब अध्यादेश लाने का फैसला किया है.

मुस्लिम समाज का ताना बाना बिगड़ेगा

सरकार के इस फैसले पर ऑल इंडिया तंजीम उलेमा- ए- इस्लाम ने असहमति जताई है। तंजीम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन का कहना है कि सरकार जिस तरह से तीन तलाक बिल को लेकर चल रही है। उससे ये साबित होता है कि वो मुस्लिम पर्सनल लॉ पर चलना नहीं चाहती है। संविधान ने हर किसी को मजहबी आजादी दी है। इसके खिलाफ तमाम चीजें हो रही है हम लोग सरकार के इस फैसले से सहमत नही है। क्योंकि कानून बनने के बाद दो तरह की चीजें होगी एक तो शरीयत पर अमल करने वाले होंगे और दूसरी तरफ कानून होगा। इससे मुस्लिम समाज का ताना बाना बिगड़ेगा और बहुत सारी परेशानियां खड़ी होंगी।

महिलाएं बोली

पीएम ने महिलाओं के दर्द को समझा

ट्रिपल तलाक पीडि़ता जो लम्बे समय से जिस कानून की मांग कर रही थी, उसे पिछले शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में पारित नहीं होने दिया था। यह महिलाओं के हक था, लेकिन विपक्ष की पार्टियों ने इसे राजनीति से जोड़ दिया। लेकिन यह मुददा पीएम ने उठाया, तो विपक्ष को लेकर इसका श्रेय मोदी सरकार ले लेगी, लेकिन विपक्ष ने यह नहीं सोचा कि यह महिलाओं से जुड़ा उत्पीड़न का मामला है। इसको लेकर महिलाओं ने मेरा हक फाउंडेशन के बैनर तले धरना भी दिया था। रैली निकाली। इसके लिए कांगे्रस जिलाध्यक्ष को एक ज्ञापन राहुल गांधी को संबोधित सौंपा। जिसमें उन्हें बताया कि यह मामला राजनीति का नहीं इस मामले में सहयोग करें.

आम आवाज ऑर्गनाइजेशन की संस्थापक फहीमा यास्मीन ने सरकार के फैसले पर खुशी जाहिर की और कहा कि सरकार का यह फैसला लाखों परिवार को उजड़ने से बचाएगा। किसी भी महिला को ट्रिपल तलाक नहीं होना चाहिए। यह इस्लाम में नहीं है, लेकिन मौलाना गलत तरीके से तलाक कराते हैं।

inextlive from Bareilly News Desk


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