नौ दिन चले अढ़ाई कोस

2018-06-10T06:01:05+05:30

मेरठ मेट्रो की डीपीआर को दोबारा बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने दिए आदेश, लागत कम करने को कवायद

मेरठ के अलावा कानपुर, आगरा में विशाखापट्टनम की तरह पीपीपी मॉडल पर होगा मेट्रो का संचालन

MEERUT। शहर के सपनों की मेट्रो एक बार फिर पटरी से लड़खड़ा रही है तो वहीं अब तक की सारी कवायद पर पानी फिरता नजर आ रहा है। 4 जून को लखनऊ में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में तय हुआ कि अब मेट्रो प्रोजेक्ट को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर पूरा किया जाएगा। इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एक सप्ताह में

विशाखापट्टनम का दौरा कर वहां भी मेट्रो परियोजना की बारीकियों को खंगालेंगे। बता दें कि विशाखापट्नम मेट्रो पीपीपी मॉडल पर है।

केंद्र सरकार से आ चुकी है वापस

वर्ष 2013 से मेरठवासियों की आंखों में तैर रहा मेरठ मेट्रो का सपना कई बार टूटा है तो कई बार जुड़ा है। केंद्र सरकार द्वारा एक बार फिर मेरठ मेट्रो की डीपीआर को वापस कर देने से यह सपना चकनाचूर होता नजर आ रहा था, हालांकि प्रदेश सरकार ने बीच का रास्ता निकालने का प्रयास किया है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 13000 करोड़ रुपये के अनुमानित लागत के मेट्रो प्रोजेक्ट की डीपीआर को लागत कम करने के निर्देश देते हुए वापस कर दिया था। 4 जून को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में मेरठ समेत आगरा और कानपुर की मेट्रो की लागत को कम करने पर जंबो मीटिंग की गई।

विशाखापट्टनम मेट्रो की तर्ज पर

शासन की मीटिंग में लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता चक्रेश जैन ने विशाखापट्टनम मेट्रो पर प्रजेंटेशन दिया था। पीपीपी मॉडल पर इस मेगा प्रोजेक्ट का निर्माण किया गया है। प्रजेंटेशन में जैन ने बताया कि 8 हजार करोड़ रुपये के लाइट मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की 50 फीसदी लागत पीपीपी मॉडल के तहत प्राप्त की गई। इसके अलावा हैदराबाद मेट्रो परियोजना को भी पीपीपी मॉडल के तहत पूर्ण किया गया है। 4 जून की बैठक में तय हुआ कि लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैदराबाद मेट्रो परियोजना के पीपीपी मॉडल का अध्ययन कर एक सप्ताह में शासन को रिपोर्ट देंगे। बता दें कि पूर्व में आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को निरीक्षण के लिए हैदराबाद जाना था।

एमडीए खर्च कर चुका है 4 करोड़

मेरठ मेट्रो की डीपीआर बनवाने में मेरठ विकास प्राधिकरण अब तक 4 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। राइट्स मेट्रो की डीपीआर बनाती है और हर संशोधन के लिए प्राधिकरण को हर बार एक मोटी रकम खर्च करनी होती है। शासन के निर्देश के बाद एक बार फिर मेट्रो की डीपीआर में बदलाव निश्चित है और ऐसी स्थिति में प्राधिकरण को एक मोटी रकम डीपीआर बनवाने के लिए खर्च करनी होगी। एक ओर पिछले दिनों मेट्रो के शिलान्यास की चर्चाएं जोरों पर थी तो एकाएक डीपीआर को पीपीपी मॉडल पर बनवाने के शासन के निर्देश के बाद योजना पर फिर आंशका के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के विशेष सचिव अमिताभ प्रकाश ने मेरठ, आगरा और कानपुर के प्राधिकरण उपाध्यक्ष को मेट्रो परियोजना को लेकर शासन स्तर पर चल रही फेरबदल की जानकारी दी है।

यह थी डेडलाइन

जुलाई 2016-प्रदेश सरकार से अप्रूवल

अक्टूबर 2016-केंद्र सरकार से अप्रूवल

दिसंबर 2016-सिविल वर्क को कमेटी का गठन

जनवरी 2017-सिविल वर्क के लिए टेंडर

मार्च 2017-केंद्र सरकार का फाइनल अप्रूवल

मार्च 2017-प्राथमिकता पर सिविल वर्क का चयन

मार्च 2022-मेट्रो का निर्माण कार्य पूर्ण

ये हैं प्रस्तावित कॉरीडोर

मेरठ मेट्रो को लेकर 2 प्रस्तावित कॉरीडोर हैं। इसकी कुल लंबाई 33 किमी होगी। दोनों कॉरीडोर में 29 मेट्रो स्टेशन होंगे। फिलहाल परतापुर से मोदीपुरम तक कॉरीडोर 1 को रैपिड रेल के साथ मर्ज कर दिया गया है।

शासन में हुई बैठक के बाद मेरठ समेत आगरा और कानपुर की मेट्रो परियोजना की डीपीआर में बदलाव की संभावना है। विशाखापट्टनम की तर्ज पर इन शहरों में मेट्रो का पीपीपी मॉडल पर संचालन हो, ऐसी कवायद शासन स्तर पर चल रही है।

साहब सिंह, उपाध्यक्ष, मेरठ विकास प्राधिकरण

inextlive from Meerut News Desk


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