अल्ट्रासाउंड जांच बताएगी डिलीवरी के लिए हायर सेंटर की जरूरत है या नहीं

2019-03-25T06:01:00+05:30

- ऐसी प्रेग्नेंसी में बच्चे की धड़कन खराब होने का रहता है खतरा

-आब्स एंड गाइनी सोसाइटी की ओर से जैस्टोरिसस 2019 का आयोजन

LUCKNOW: प्रेग्नेंसी के नौवें माह में अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में सीपीआर एक से कम हो तो मरीज को हायर सेंटर में इलाज की आवश्यक्ता है। ताकि जरुरत पड़ने पर बच्चे को एनआईसीयू की सुविधा मिल सके। केजीएमयू में 200 से अधिक मरीजों पर की गई स्टडी के बाद डॉ। सीमा मेहरोत्रा व उनकी टीम ने यह निष्कर्ष निकाला है। उन्हें उम्मीद है कि इस निष्कर्ष से बड़ी संख्या में जच्चा बच्चा को बचाया जा सकेगा।

नौवें माह में कराएं जांच

केजीएमयू की आब्स एंड गाइनी विभाग की डॉ। सीमा मेहरोत्रा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड कलर डाप्लर से प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में यह पता लगाया जा सकता है कि फीटल डिस्ट्रेस की समस्या तो नहीं है। कहीं उसकी धड़कन खराब तो नहीं है। अल्ट्रासाउंड की जांच में सीपीआर यदि एक से कम है तो इसका मतलब है कि डिलीवरी हायर सेंटर पर होनी चाहिए। सीपीआर कम होने पर बच्चे की डेथ होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी जगह पर डिलीवरी कराएं जहां पर बच्चे को वेंटीलेटर की सुविधा मिल सके।

पीएचसी, सीएचसी से करें रेफर

डॉ। सीमा मेहरोत्रा की गाइडेंस में क्वीनमेरी में डॉ। शिखा ने करीब 200 मरीजों पर स्टडी कर निष्कर्ष निकाला है कि सीपीआर कम होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ती है। सीपीआर कम होने का मतलब है कि बच्चे की धड़कन खराब हो सकती है। ऐसे में डिलीवरी के तुरंत बाद वेंटीलेटर की आवश्यक्ता पड़ी है। इसलिए ऐसी प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की डिलीवरी सीएचसी, पीएचसी या ऐसे सेंटर पर न करके उन्हें हायर सेंटर पर रेफर किया जाए। डॉ। सीमा मेहरोत्रा ने बताया कि आजकल सीचएसी, पीएचसी में भी अल्ट्रासाउंड है और एमबीबीएस डॉक्टर भी ये छोटी जांच कर सकता है। इस तकनीक को अपना कर हम बड़ी संख्या में महिला मरीजों और बच्चों की जान जाने से बचा सकते हैं।

कोट-फोटो

पॉल्यूशन बच्चों में मंदबुद्धि की वजह

प्रेग्नेंसी के तीसरे माह में जांच से पता लगाया जा सकता है कि बच्चा सामान्य है या मंदबुद्धि। समय से बच्चे के मंदबुद्धि होने पर बच्चे को हटाया जा सकता है। यदि एक बच्चा किसी समस्या के साथ पैदा हुआ है तो प्रेग्नेंसी से पहले और प्रेग्नेंसी के दौरान सभी जांचें कराकर दूसरे बच्चे को बचाया जा सकता है। आनुवांशिक कारणों, प्रदूषण व अन्य कारणों के कारण बच्चों में मंदबुद्धि होने की समस्या हो रही है।

डॉ। इंदुलता

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हरी पत्तेदार सब्जियां जरूर खाएं

प्रेग्नेंसी के दौरान हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन जरूर करें। इसके अलावा सोयाबीन, आखरोट, ताजे फल जैसे अमरूद, संतरा, आंवला खाना बेहतर रहता है। इससे एनीमिया की समस्या नहीं होगी। एनीमिया से बचाव जरुरी है क्योंकि इसके कारण थकान, हाथ पैरों के ठंडा होने, सांस लेने में दिक्कत, हार्ट अटैक की भी समस्या हो सकती है।

डॉ सुजाता देव

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वोमिटिंग को न करें इग्नोर

प्रेग्नेंसी के दौरान उल्टी की समस्या लगातार हो रही है तो इसे इग्नोर न करें। इसके कारण किडनी फेल होने की भी आशंका बढ़ती है। उल्टी या वोमेटिंग को प्रेग्नेंसी से जोड़कर न देखें। लगातार उल्टी पित्ताशय की थैली में स्टोन और हाइपरटेंशन की वजह भी हो सकती है।

डॉ। विनीता अवस्थी

inextlive from Lucknow News Desk


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