परमाणु कार्यक्रम की जानकारी न देने पर रूस और चीन को अमेरिका की चेतावनी तोड़ देंगे समझौता

2019-01-30T02:03:00+05:30

अमेरिका का आरोप है कि रूस और चीन अपने परमाणु कार्यक्रमों के बारे में पूरी तरह से रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं। उसने चेतावनी दी है कि अगर पूरी तरह से जानकरी नहीं मिली तो वह समझौते को तोड़ देगा।

बीजिंग (एएफपी)। परमाणु कार्यक्रम में अधिक पारदर्शिता हो, इसके लिए अमेरिका ने बुधवार को एक बैठक में भाग लिया। दरअसल, अमेरिका का आरोप है कि रूस और चीन अपने परमाणु कार्यक्रमों के बारे में पूरी तरह से रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं और उसने चेतावनी दी है कि अगर वे पारदर्शिता नहीं दिखाते हैं तो वह समझौते को तोड़ देगा। अमेरिका में आर्म्स कंट्रोल एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी मंत्री एंड्रिया थॉम्पसन ने परमाणु निरस्त्रीकरण और अप्रसार ने बीजिंग में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि परमाणु अप्रसार संधि के तहत सभी देशों के बीच पारदर्शिता के समान परिणाम नहीं देख रहे हैं।
रिपोर्ट के लिए ए फॉर्मेट तैयार करने पर सहमत
बैठक के दौरान थॉम्पसन ने अपनी शुरुआत टिप्पणी में कहा, 'हम पहले रिपोर्ट करने के लिए (ए) फॉर्मेट तैयार करने पर सहमत थे लेकिन एक तरफ अमेरिका की रिपोर्ट और दूसरी तरफ रूस और चीन के बीच का अंतर काफी ज्यादा है।' उन्होंने कहा, 'हम इस बात पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं कि हम कैसे दूसरे को अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त करें और अपने पारदर्शिता को बढ़ा सकें। बता दें कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत होने वाली बैठक में रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के अधिकारियों ने भाग लिया और गुरुवार को भी इस विषय पर बातचीत जारी रहेगी। बता दें कि कुछ महीने पहले मॉस्को और वाशिंगटन के बीच 1987 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा हस्ताक्षर किए गए इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस संधि (INF) के विषय को लेकर तनाव शुरू हो गया था, उसी के बाद यह वार्ता शुरू हुई है।
ट्रंप ने कही समझौते से बाहर निकलने की बात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु कार्यक्रम की जानकारी न देने पर समझौते से बाहर निकलने की बात कही है, जबकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हथियारों की एक नई दौड़ की धमकी देते हुए कहा है कि यूरोप इसका मुख्य शिकार होगा। इस महीने की शुरुआत में, दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिकों के बीच जिनेवा में एक बातचीत हुई थी, उस दौरान वाशिंगटन और मॉस्को दोनों ने एक दूसरे को दोषी ठहराते हुए आईएन संधि को समाप्त करने के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया था।

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