सरकार संगठन और सुलह!

2016-07-10T07:41:42+05:30

स्टेट हेडक्वार्टर में पीसीसी चीफ से मिले सीएम, दिए संगठन के सवालों के जवाब

-चुनाव से पहले सबकुछ ठीक करने की कोशिश

-सूत्रों के मुताबिक हाईकमान ने दी थी पीसीसी चीफ और सीएम को हिदायत

देहरादून, सूबे की कांग्रेस सरकार और संगठन के बीच की खाई शायद अब पट जाए। इसके लिए खुद सीएम हरीश रावत आगे आए हैं। पिछले दिनों संगठन कई मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल खड़े कर रहा था। संगठन की तरफ से पीसीसी अध्यक्ष किशोर रावत ने कई मसलों को लेकर सीएम को लेटर भी लिखे थे। शनिवार को खुद सीएम हरीश रावत प्रदेश संगठन की तरफ के किए गए तमाम सवालों के जवाब लेकर कांग्रेस के हेडक्वार्टर पहुंचे। अंदरखाने खबर ये है कि चुनावी साल में सबकुछ ठीक हो जाए इसीलिए हरीश रावत ने ये कदम उठाया है। आईनेक्स्ट ने आपको पिछले दिनों अंदर की खबरें बताई थी कि किस तरह किशोर उपाध्याय और हरीश रावत के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। इतना ही नहीं, दोनों ने एक के बाद एक दिल्ली दरबार में दौड़ लगाई। यह सब सरकार और संगठन की लड़ाई को लेकर ही हो रहा था।

मिली थी कड़ी हिदायत

मार्च में जब प्रदेश में सियासी भूचाल आया था तब कांग्रेस में सब कुछ ठीक था और हाथ से हाथ मिलाकर चले संगठन और सरकार की बदौलत ही वो बीजेपी को मात दे पाई। लेकिन राज्यसभा चुनाव के बाद किशोर उपाध्याय ने तो सरकार के खिलाफ खुलकर ही मोर्चा खोल दिया था। सरकार और संगठन की इस जंग को लेकर हाईकमान बेहद खफा था। अंदरखाने खबर ये है कि पीसीसी अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और सीएम हरीश रावत दोनों को ही आलाकमान ने कड़ी हिदायत दी थी कि सारे मसले आपस में सुलझा लें, वरना इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। बताया यह भी जा रहा है कि दो दिन पहले प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी जब दून पहुंची थीं तब उन्होंने भी सीएम और पीसीसी चीफ से बंद कमरे में इस आपसी खींचतान को लेकर चर्चा की थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पीसीसी चीफ किशोर उपाध्याय को उनकी बयानबाजी के लिए कड़ी हिदायत भी दी गई थी। इसके बाद ही सुलह-समझौते की शुरुआत खुद सीएम हरीश रावत ने की और शनिवार को सुबह एक बजे पार्टी मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एक घंटे किशोर के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की।

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तो किशोर चारों खाने चित्त?

अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के फेर में पीसीसी अध्यक्ष किशोर उपाध्याय लगातार अपनी ही सरकार पर हमला बोल रहे थे। दरअसल किशोर राज्यसभा का टिकट कटने के बाद नाराज चल रहे थे। इसके बाद उन्होंने सरकार के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया था। सीएम हरीश रावत की तरफ से बार-बार यही बयान सामने आए कि अगर किसी को कुछ शिकायत है तो उसे मिल बैठकर दूर कर लिया जाएगा। सियासी दांवपेंचों में माहिर माने जाने वाले सीएम हरीश रावत ने खुद इस ओर पहल करके एक तरह से किशोर को चारों खाने चित कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक भी यही मानते हैं कि इसका पूरा श्रेय सीएम को जाएगा और नेगेटिव इमेज किशोर की ही बनेगी।

क्या मुद्दे उठा रहे थे किशोर

-दूसरी पार्टी के नेताओं को सरकार में खासी तवज्जो।

-बिन संगठन की राय के दूसरे दल के नेताओं को पार्टी हाईकमान तक ले जाना।

-रास सभा में पीसीसी अध्यक्ष को टिकट न मिलना।

-पीडीएफ सदस्य दिनेश धनै को टिहरी से टिकट देने का मामला।

-पार्टी कार्यकर्ताओं को सरकार की तरफ से तवज्जो न मिलना।

-रास सांसद जिले व ब्लाक कांग्रेस पदाधिकारियों को अपना प्रतिनिधि बनाएं।

-कैबिनेट मंत्री प्रदेश कार्यालय मुख्यालय पर कार्यकर्ताओं की दिक्कतों को सुनें।

::वर्जन::

कांग्रेस में ऐसी नौटंकी चलती रहती है। प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय अपनी ही सरकार पर उनके नौ सौ से भी अधिक पत्रों का जवाब न देने का आरोप लगाते रहे हैं। अब सीएम हरीश रावत किशोर से गले मिल रहे हैं तो जनता सब जानती है।

अजय भट्ट, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष।

inextlive from Dehradun News Desk


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