देश के 6 स्टेशनों में शामिल वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन बनेगा ग्रीन कैंपस

2018-05-31T08:41:45+05:30

सीआईआई के ग्रीन कैंपस में देश के सेलेक्ट छह स्टेशन में वाराणसी कैंट भी शामिल टीम ने कैंपस का किया इंस्पेक्शन ऑफिसर्स संग मीटिंग में देखा प्रेजेंटेशन सीआईआई के ग्रीन कैंपस में देश के सेलेक्ट छह स्टेशन में वाराणसी कैंट भी शामिल

टीम ने कैंपस का किया इंस्पेक्शन, ऑफिसर्स संग मीटिंग में देखा प्रेजेंटेशन

VARANASI : कैंट रेलवे स्टेशन जल्द ही ग्रीन कैंपस की लिस्ट में शामिल हो जाएगा। ग्रीन बनाने के लिए देश के छह रेलवे स्टेशंस में कैंट को भी शामिल किया गया है। इसमें पूरे कैंपस में प्लांटेशन के अलावा सोलर सिस्टम, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट, सीवेज सिस्टम, व्हीकल मैनेजमेंट सहित अन्य प्लान शामिल हैं। सोलर प्लांट व एलईडी का काम पूरा हो चुका है। यही नहीं प्लांटेशन में विभिन्न वेराइटी के प्लांट का ध्यान रखा जाना है। इसकी शुरुआत हो गयी है। कैंपस में डेवलपमेंट वर्क खत्म होते ही यह आकार भी ले लेगा। बता दें कि सिकंदराबाद देश का पहला ग्रीन रेलवे स्टेशन बन गया है। इस दिशा में कैंट स्टेशन वाराणसी ने भी कदम बढ़ा दिया है। बुधवार को कांफिडेरेशन इंडियन इंडस्ट्री की चार सदस्यीय टीम ने स्टेशन का इंस्पेक्शन कर कई सुझाव दिया। साथ ही कैंपस में हुए वर्क की एनईआर डीआरएम ऑफिस में प्रेजेंटेशन भी हुआ।

 

सोलर एनर्जी से जगमगा रहा कैंपस

 

कैंट स्टेशन की लाइटिंग के लिए यहां सोलर प्लांट लगा दिया गया है। जिससे कैंपस व सर्कुलेटिंग एरिया में लगी एलईडी लाइट को जोड़ दिया गया है। इसके चलते बिजली की सप्लाई ठप होने पर भी अब भारी भरकम जेनरेटर नहीं चलाया जाता। जेनरेटर न चलने से फायदा यह है कि कैंपस में विषैला धुंआ नहीं फैलता। कैंपस में म्00 केवी का सोलर प्लांट लगा है। इस प्लांट के सोलर प्लेट मेन बिल्डिंग व प्लेटफॉर्म की छत पर लगाए गए हैं। इससे पूरे कैंपस में लाइटिंग के लिए बिजली की सप्लाई हो रही है। खास बात यह कि एलईडी के चलते बिजली की खपत भी कम हो रही है। फिलहाल कैंट स्टेशन कैंपस में क्8 परसेंट सोलर एनर्जी का यूज हो रहा है, इसे अगले आठ महीने में फ्0 परसेंट तक ले जाना है।

 

प्राइवेट एजेंसी को जिम्मा

 

स्टेशन में प्लांटेशन का काम एक प्राइवेट एजेंसी को सौंपा गया है। जिसको पौधों के देखरेख की भी जिम्मेदारी दी गयी है। इसमें पिछले दिनों ख्ख्ख् पौधे लगाए गए थे, जिसमें से क्ब्0 पौधे बचे हैं। टीम के सामने प्रेजेंटेशन में कैंट स्टेशन एडमिनिस्ट्रेशन ने कैंपस के खाली जगहों पर प्लांटेशन का डिटेल प्रस्तुत किया। इसमें कई जगह फिर से रोपे जाने वाले पेड़ भी लगेंगे। इसके लिए जगह चिन्हित कर सीआईआई को रिपोर्ट भेजा जाएगा। बता दें कि कैंपस में पांच साल पहले कई विशालकाय पेड़ थे। जिनसे पूरा कैंपस हरा-भरा था। लेकिन ये सारे पेड़ डेवलपमेंट की भेंट चढ़ गए। अब जब सर्कुलेटिंग एरिया को डेवलप करने का काम अंतिम दौर में है तो हरियाली की कमी महसूस की जा रही है। प्राइवेट एजेंसी सर्कुलेटिंग एरिया, सेकेंड एंट्री सहित यार्ड, ट्रैक, स्टाफ कॉलोनी की खाली जमीन पर प्लांटेशन करेगी।

 

वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट

 

कैंपस में यात्री आश्रय, डारमेट्री व प्लेटफॉर्म से निकलने वाले वेस्ट वॉटर को फिर से यूज करने का भी टीम ने पड़ताल किया। जिसमें एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से बताया गया कि पानी को फिर से उपयोगी बनाने के लिए कैंपस में ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है। जिसे टीम ने मौके पर जाकर देखा। यह प्लांट अगले चार महीने में कार्य करने लगेगा। इसके अलावा टीम ने सालिड वेस्ट मैनेजमेंट पर भी सवाल किया। स्टेशन डायरेक्टर ने बताया कि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट का डीपीआर तैयार है। बोर्ड की मुहर लगते ही इसपर कार्य स्टार्ट हो जाएगा। इसे एक साल में पूरा करने का टीम को भरोसा दिलाया गया। यही नहीं कैंपस में चार बॉटल क्रशर लगाने की भी जानकारी दी गयी। बताया गया कि एक महीने में कैंपस में चार क्रशर विभिन्न जगहों पर लग जाएंगे। मीटिंग में एडीआरएम आरपी चतुर्वेदी, स्टेशन डायरेक्टर राधेमोहन सिंह, सीनियर डीएनई, डीईई, एईएन सहित अन्य ऑफिसर्स शामिल रहे।

 

ये बनेंगे ग्रीन स्टेशन

 

- कटरा

- सिकंदराबाद

- चेन्नई

- नई दिल्ली

- बनारस

- बंगलुरू


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