संभलें ये मजबूरी कहीं मौत न बन जाए

2018-04-29T07:00:05+05:30

70 प्रतिशत स्कूलों के पास नहीं हैं अपने वाहन, ले लेते हैं ठूंस कर एडमिशन

मजबूरन पैरेंट्स को असुरक्षित प्राइवेट वाहनों से बच्चों को भेजना पड़ता है स्कूल

ALLAHABAD: नाम बड़े और दर्शन छोटे। जी हां, हम बात कर रहे हैं उन स्कूलों की जिनके पास अपने वाहन नहीं हैं या कम हैं। फिर भी ये थोक में बच्चों का एडमिशन ले लेते हैं। मजबूरी में पैरेंट्स को प्राइवेट वाहनों से बच्चों को स्कूल भेजना पड़ता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा दांव पर रहती है.

लेते हैं मनमाना पैसा

स्कूलों द्वारा पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं कराने का फायदा प्राइवेट वाहन उठाते हैं। वे पैरेंट्स से मनचाहा पैसा वसूलते हैं। महज डेढ़ से दो किमी की दूरी के लिए 700 से 800 रुपए की वसूली की जाती है। स्कूल के वाहनों में इसके लिए 500 से 600 रुपए लगते हैं.

30 फीसदी स्कूलों में ही वाहन

शहर में हजारों की संख्या में स्कूल संचालित हैं। इनमें से महज 30 फीसदी स्कूलों के पास ही अपनी बसें हैं। बाकी 70 प्रतिशत स्कूल एडमिशन तो जमकर लेते हैं पर बच्चों के लिए सेफ साधन नहीं उपलब्ध कराते.

कुछ स्कूलों की बसें ही मानक पूरा करती हैं। अधिकांश स्कूल प्राइवेट बसों को यूज करते हैं। इनको आरटीओ परमिट देते हैं। यदि प्रशासन इनकी जांच समय- समय पर करता रहे तो हादसों से बचा जा सकता है.

सुष्मिता कानूनगो, प्रिंसिपल, महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर

बच्चों के प्रति जितनी जिम्मेदारी स्कूल की होती है, उतनी ही पैरेंट्स की भी है। हमे देखना होगा कि जिस स्कूल में बच्चों का एडमिशन करा रहे हैं, वहां पर ट्रांसपोर्टेशन की क्या सुविधा है.

अल्पना डे, प्रिंसिपल, गंगागुरुकुलम

स्कूल में बस नहीं है, बच्चों को प्राइवेट वाहन से ही स्कूल भेजना पड़ता है। उसकी भी हालत ठीक नहीं है। फिर भी उसी वाहन से बच्चों को भेजना मजबूरी है।

रमा दुबे, पैरेंट्स

पैरेंट्स को अब जागरूक होना होगा। प्राइवेट वाहनों के ड्राइवरों का स्टेटस चेक करना जरूरी है। अगर वाहन खटारा है तो उसमें बच्चे को कतई नहीं भेजना चाहिए.

डॉ। राजीव सिंह, पैरेंट्स

एग्जाम्पल वन

बेनीगंज निवासी विवेक ने कालिंदीपुरम स्थित एक स्कूल में बेटे का एडमिशन कराया है। पता चला कि उनके इलाके के लिए बस उपलब्ध नहीं है। बच्चे को स्कूल जाने के लिए प्राइवेट वाहन का इंतजाम किए। कहते हैं कि खटारा वाहन से मजबूरी में बेटे को रोज स्कूल भेजना पड़ रहा है.

एग्जाम्पल टू

धूमनगंज निवासी बिजनेसमैन तरुण जायसवाल का बेटा ट्रांसपोर्टनगर स्थित एक स्कूल में कक्षा दो का छात्र है। बेटा टैंपो से स्कूल जाता है। स्कूल के पास एक बस है। वह दूसरे रूट पर चलती है। ऐसे में वे बेटे की सेफ्टी को लेकर परेशान रहते हैं.

पुरानी घटनाएं

12

फरवरी 2018 को नैनी स्थित गंगोत्री नगर कब्रिस्तान के पास स्कूली बस पेड़ से टकराई आठ छात्र जख्मी

05

सितंबर 2017 को जमुवा गांव के पास स्कूल वाहन में बैठने जा रहे छात्र को बस ने कुचला, मौत

25

अक्टूबर 2017 को स्कूली वैन मऊआइमा के बागी गांव स्थित नाले में पलटी, आधा दर्जन छात्र घायल

05

दिसंबर 2015 को नैनी औद्योगिक क्षेत्र में स्कूल वाहन डीसीएम से टकराया, 18 छात्र घायल

inextlive from Allahabad News Desk


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