MillennialsSpeak कानपुर में #RaajniTEA पर एक आवाज सेना पर पॉलिटिक्स की दुकान न सजाएं राजनीतिक पार्टियां

2019-02-22T11:56:35+05:30

सीएसजेएमयू इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट में दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की ओर से ऑर्गनाइज्ड की गई मिलेनियल्स स्पीक

- यूथ ने चुनावी मुद्दों पर कही अपने दिल की बात

 

kanpur@inext.co.in
kanpur : यंग जनरेशन के साथ हमारी कंट्री पूरे व‌र्ल्ड में टॉप पर पहुंचने वाली है. जानकारों के अनुसार आने वाले कुछ समय में देश की जीडीपी में इन्हीं यंगस्टर्स की वजह से बहुत तेज उछाल देखने को मिलेगी. सभी देशों के हर तरह के डेवलपमेंट के पीछे वहां की गवर्नमेंट को मुख्य जिम्मेदार माना जाता है. ऐसे में दैनिक जागरण आई नेक्स्ट और रेडियो सिटी यूथ को मिलेनियल्स स्पीक के थ्रू अपने चुनावी मुद्दे पब्लिक के सामने रखने का मौका दे रहा है. हम हर रोज शहर में यूथ के बीच पहुंच कर उनके चुनावी मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं. थर्सडे को हम सीएसजेएमयू के इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट डिपार्टमेंट में पहुंचे. यहां स्टूडेंट्स ने रेडियो सिटी आरजे राघव को अपने बीच पाकर खुशी का एहसास किया और एक-एक कर अपने चुनावी मुद्दे हमसे श्ोयर किए.

सेना पर न हो पॉलिटिक्स
पुलवामा में जवानों पर हुए टेररिस्ट अटैक को लेकर यूथ में काफी रोष देखने को मिला. यूथ ने पहले शहीदों को श्रद्धांजलि दी और इसके बाद सेना को देश की पॉलिटिक्स से दूर रखने की बात कही. ज्योति, अमित और प्रत्यूष ने कहा कि आतंकियों ने हमारी सेना पर अटैक किया, जिस पर सत्ता या विपक्ष को कोई भी पॉलिटिक्स करने की जरूरत नहीं है. हमें सिर्फ बदला चाहिए और ऐसा बदला कि बार-बार हमारे जवान शहीद न हों. कहा कुछ दिन शांत रहने के बाद अन्य पार्टियों ने फिर से इसे चुनावी मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है, जो बहुत शर्मनाक बात है. यूथ जब इन बातों को हमसे शेयर कर रहे थे, तो उनके चेहरे पर गुस्से का भाव साफ झलक रहा था.

क्राइम कंट्रोल करने की हो बात
इस गहमागहमी के बीच बातचीत शुरू हुई तो अमित, प्रतीक व ज्योति ने कहा कि कंट्री में अभी भी डेवलपमेंट की जरूरत है. हमें टेक्निकल फील्ड में आगे बढ़ने के साथ ही डेवलपमेंट की ओर भी लगातार बढ़ते रहने की जरूरत है. कहा क्रिमिनल्स बेखौफ हैं, खासकर विमेन के साथ आए दिन लूट की घटना को सुबूत बताया. सिटी में हर जगह सीसीटीवी कैमरों की मांग करते हुए कहा यह सब डेवलपमेंट का ही एक पार्ट है. आज जहां डेवलप देशों में यह सब मूलभूत सुविधाओं का एक पार्ट है, वहीं अभी हमारी कंट्री में इसे लेकर सोच विचार ही चल रहा है.

डेवलपमेंट दें तो यही गवर्नमेंट
यूथ की इस बात को काटते हुए शिवम, आलोक और दीपक ने कहा कहा कि इस गवर्नमेंट में क्राइम कंट्रोल हुआ है. क्रिमिनल्स का हॉफ एनकाउंटर होने से उनमें डर पनपा है, जिससे वो घटनाओं को अंजाम देने में डरते नजर आते हैं. कहा अब अगर इतना बदलाव किसी को नहीं दिखता है, तो फिर उसकी गलती है. कहा डेवलपमेंट का मुद्दा चुनावी मुद्दा बन सकता है. अगर डेवलपमेंट होने लगे तो प्रेजेंट गवर्नमेंट को ही फिर से वोट देने की बात कही.

काम करने की हो प्राथमिकता
कहा चुनाव नजदीक होता है तो पार्टियों के नेता घरों के चक्कर लगाने लगते हैं. एक बार जीतने के बाद उनका चेहरा तक नहीं दिखता है. ऐसा नेता चाहिए, जो जनता के साथ हर अच्छे और बुरे वक्त में खड़ा हो सके. चुनाव के पहले या बाद में चक्कर लगाने वाला नेता नहीं, बल्कि हमें काम करने वाली गवर्नमेंट चाहिए.

यूथ को सौंपी जाए कमान
प्रीति, मंजू व राजेश ने कहा कि जब देश यूथ का है तो राजनीतिक पार्टियों में भी यूथ को ही मौका मिलना चाहिए. कहा प्रजेंट पार्टी के सांसद को ही देख लीजिए कि वो जीतने के बाद कितने दिन जनता के बीच रहे. ऐसे में अगर कोई युवा सांसद होता तो शहर की तस्वीर बदलने का काम करता.

करप्शन को मिटाना हो टारगेट
आशीष, सर्वेश और नयना ने कहा कि चुनाव आते ही पार्टी के नेता तमाम वादे करने लगते हैं. इनमें कुछ जनता के मतलब के होते हैं, तो कुछ उनके खुद के मतलब के होते हैं. इस करप्शन का जड़ से खात्मा करने वाला चाहिए. छोटे से काम से लेकर बड़े स्तर के काम में कमीशनखोरी होती है, जिससे उनकी जेबें भरती हैं. हम ऐसी ही पार्टी को वोट करेंगे जो कंट्री से करप्शन का खात्मा कर सके.

विमेन इम्पॉवरमेंट की हो बात
मंजू और प्राची ने कहा कि विमेन सेफ्टी की तो अक्सर बात की जाती है, लेकिन विमेन इम्पॉवरमेंट की भी बात होनी चाहिए. विमेन मजबूत होगी तो अपनी सेफ्टी भी खुद कर ही लेगी. लेकिन, कमजोर विमेन को कब सेफ्टी दी जाएगी. कहा अक्सर कोचिंग, कॉलेज से लौटते वक्त लड़कियों से शोहदे छेड़छाड़ करते हैं. शोहदों को सबक सिखाना पुलिस का टारगेट हो, न कि इसके नाम पर उगाही शुरू कर दी जाए.

 

मिलेनियल्स वर्जन-

 

- पार्टियों में यूथ को मौका मिलना चाहिए. आज का यूथ एजूकेटेड, शार्प माइंड और लोगों की जरूरतों को समझने वाला है. ऐसे लोग पालीटिक्स में आएंगे तो अपनी कंट्री की हालत को सुधारने का प्रयास करेंगे.
-
ज्योति वर्मा

- युवाओं को डेवलपमेंट, इम्प्लॉयमेंट और सेफ्टी चाहिए. इससे वो समाज में अपनी अलग पहचान बना सकें. पढ़ाई लिखाई करने के बाद यूथ को बाहर न जाना पड़े गवर्नमेंट को इस ओर भी फोकस करना चाहिए.
- मंजू

- शिक्षा और स्वास्थ्य में पहले से कुछ बदलाव देखने को मिल रहे हैं. लेकिन, अभी भी काफी बदलाव की जरूरत है. अक्सर गर्वनमेंट हॉस्पिटल में लोगों के साथ बदसलूकी की जाती है. इस पर भी लगाम लगनी चाहिए.
- प्रतीक

- भ्रष्टाचार का मुद्दा हमेशा से उठता रहा है लेकिन, कोई गवर्नमेंट इस पर पूरी तरह से अंकुश नहीं लगा पाई है. कुछ नेता तो सिर्फ जेब भरने के लिए चुनाव लड़ते हैं और जीतने के बाद उन्हें जनता से कोई मतलब नहीं होता है.
- प्रत्यूष

- वर्तमान गवर्नमेंट में कई ऐसी योजनाएं बनाई गई हैं, जो यूथ के मतलब की हैं. इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए सिर्फ उन्हें सही गाइडेंस की जरूरत है. गवर्नमेंट में लगभग सब ठीक है. डेवलपमेंट पर काम बाकी है.
- शिखर

- चुनाव से पहले नेता घरों के बाहर दिखाई देते हैं. जबकि, सच्चा नेता वही है, जो चुनाव जीतने के बाद भी जनता के बीच में रह कर उनकी समस्याओं को समझे और उसे अपने पॉवर का इस्तेमाल कर छुटकारा दिलाए.
-
रत्नेश सिंह

- स्टडी और जॉब के लिए लोग बाहर चले जाते हैं. कंट्री में कई बार उनके मतलब का काम नहीं मिल पाता है. अगर उन्हें अगर अपनी काबलियत के अनुसार यहां ही सब कुछ मिल जाए तो तो कोई कंट्री न छोड़े.

- प्रीती रावत

कड़क मुद्दा
करप्शन मिटाने के लिए ऐसी गवर्नमेंट चाहिए, जो सख्ती के साथ फैसले ले सके. जो गलती करे उसे सजा मिलनी चाहिए. जबकि, अभी तक गलती पकड़े जाने पर भी जिम्मेदार उनकी गलतियों पर पर्दा डालते दिखाई देते हैं. हमारी कंट्री में कानून को सख्त करने की जरूरत है. मसलन अगर कोई आम नागरिक से लेकर वीआईपी भी किसी रूल को फालो करने में आनाकानी करता है, तो उस पर एक समान कार्रवाई होनी चाहिए. लोग अपनी ऊंची पहुंच का फायदा उठा कर कार्रवाई से बच जाते हैं. यही कमी हमारी कंट्री को काफी पीछे ले जा रही है.

 

 

मेरी बात -
मुझे लगता है कि आज भी हममें सिविक सेंस की कमी है. सिविक सेंस किसी गवर्नमेंट से मतलब नहीं रखता है. सिविक सेंस तब ही डेवलप होगा, जब हम अपने बच्चों को बचपन में ही रूल्स को फालो करना सिखाएंगे. आप राह चलते देख सकते हैं कि लोग हाथों में लिया हुआ कूड़ा कहीं भी फेंक देते है. लेकिन, वहीं जिनमें सिविक सेंस होगा वो डस्टबिन मिलने तक कूड़ा अपने ही पास रखता है. इसी तरह बात अगर ट्रैफिक रूल्स की करें तो इसे तोड़ने में भी हम आगे दिखते हैं. सिर्फ इस गलती की वजह से हम सैकड़ों लोगों को जाम में फंसा देते हैं. शहर में जाम तो रोज की समस्या हो गया है. क्या कोई गवर्नमेंट हमें इस जाम से निजात दिला सकती है.

- हम अपनी सेना की बात करते हैं, लेकिन क्या कभी सेना के जवानों की समस्याओं को सुना है. इजरायल जैसे देश अपनी सेना पर जितना बजट खर्च करते हैं, हम उससे ज्यादा बजट सिर्फ क्रिकेट पर खर्च कर देते हैं. जो हमारी और कंट्री की सुरक्षा करते हैं उनके बारे में सोचने वाली गवर्नमेंट चाहिए. अगर जवानों को कोई समस्या न होती तो फिर आए दिन उनके सुसाइड करने की खबरें क्यों सुनने को मिलती हैं. सबसे ज्यादा बजट हमारी सुरक्षा और सेना पर ही गवर्नमेंट को खर्च करना चाहिए, बाकी सब कुछ बाद में हो.

- हम एक नए बदलाव से गुजर रहे हैं. हमारी कंट्री पहले से स्ट्रांग है, हमारी आर्मी भी पहले से ज्यादा मजबूत है. अब बात करते हैं यूथ की तो उन्हें भी कंट्री को अब अंदर से मजबूत बनाने की जरूरत है. यूथ जॉब के लिए बाहर चले जाते हैं और पैसा कमाते हैं. अगर हमारी कंट्री में कुछ कम भी पैसा मिले तो भी हमें यहीं पर ही रह कर अपनी कंट्री को मजबूत करने की जरूरत है. शिक्षित समाज में रहने वाले लोगों को ज्यादा कुछ बताने और समझाने की जरूरत नहीं होती है. पास में खाली पड़े प्लाट में लोग कूड़ा फेंक देते थे, लेकिन अब ऐसा करने से बचते दिखते हैं. इसलिए, मेरा मुद्दा शिक्षा का स्तर सुधारना है. शिक्षित होने से हमारी कंट्री की 80 परसेंट तक समस्याओं का हल निकाला जा सकता है.


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.