कौन व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से जागृत है? जानें साध्वी भगवती सरस्वती से

2019-01-17T11:08:57+05:30

आध्यात्मिक जागृति दिव्य ब्रह्मांड के निमंत्रण को पूरी तरह से स्वीकार करने का अनुभव है कि हम उसके साथ एक हो चुके हैं। यह परमात्मा में पूरी तरह विलीन हो जाने का अनुभव है।

आध्यात्मिक जागृति के लक्षण क्या हैं? अस्मित कुमार, बरेली

भगवद्गीता में, भगवान कृष्ण ने बड़े ही सुंदर तरीके से यह विवरण दिया है कि हम कैसे जानें कि कोई योगी है, जागृत है, संगठित है। आध्यात्मिक जागृति दिव्य ब्रह्मांड के निमंत्रण को पूरी तरह से स्वीकार करने का अनुभव है कि हम उसके साथ एक हो चुके हैं। यह परमात्मा में पूरी तरह विलीन हो जाने का अनुभव है। जिन्होंने यह अनुभव किया है, उनका जीवन प्रकाशमय है। यही आत्मज्ञान है: प्रकाश को जीना।

मेरे गुरु, पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वतीजी हमेशा कहते हैं कि जब कोई प्रबुद्ध हो जाता है, तो उसके सींग नहीं उग आती हैं; न ही कोई बड़े शारीरिक परिवर्तन होते हैं। इसके बजाय व्यक्ति अज्ञान और अहंकार के अंधेरे से, सत्य और ज्ञान के प्रकाश में रहने लगता है। जो लोग आध्यात्मिक रूप से जागृत हो चुके हैं, वे ऐसे ही प्रकाश से भरे हुए हैं। वे स्वतंत्र भी हैं। जब हम मुक्ति या मोक्ष की बात करते हैं, तो यह मृत्यु के बाद की बात नहीं होती है। वास्तव में मुक्ति शरीर से मुक्ति नहीं होती है, बल्कि शरीर में रहकर माया-मोह से मुक्ति है। सच्चा मोक्ष तो हमारी अज्ञानता से मुक्ति है, हमारे अहंकार से मुक्ति है, हमारे भय और इच्छाओं से मुक्ति है और हमारी पहचान व इतिहास से मुक्ति है।

जो आध्यात्मिक रूप से जागृत हैं, वह उन जंजीरों से मुक्त हैं जो हममें से अधिकांश को बांधे हुए है। वे दुनिया में रहते हैं, लेकिन प्रतिक्रिया न करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्हें दुनिया में होने वाली घटनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है क्योंकि वो इससे परे हैं। वहीं जो लोग जागृत नहीं हुए हैं, वे हर घटना और हर व्यक्ति पर प्रतिक्रिया करते हुए लगातार कुछ कहने में व्यस्त रहते हैं।

जागृति हमें मुक्त करती है। इसके अलावा जो जागृत हैं, वे वास्तव में प्रेम के अवतार हैं। प्रेम ब्रह्मांड की ऊर्जा है, और जो जागृत हैं वे इस ऊर्जा से खुद भी जुड़े हुए हैं और इसे सभी को दे भी रहे हैं। हमें यह निरंतर प्रयास करना चाहिए कि हम दुनिया की घटनाओं में प्रतिक्रिया देने के बजाए ध्यान-अभ्यास में खुद को व्यस्त रखें। इससे हम भीतरी शांति का अनुभव करेंगे। धीरे-धीरे हम उस अवस्था तक पहुंचेंगे जिसे जागृत अवस्था कहा जाता है। तब हमें अहसास होगा कि मनुष्य परमात्मा का ही एक अंश है।

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