जानें क्या होता है योयो टेस्ट जिसे धोनी से लेकर कोहली तक सबको पास करना होता है

2018-06-20T11:37:08+05:30

टीम इंडिया में जगह पाने के लिए अब योयो टेस्ट को अनिवार्य कर दिया गया है। जानिए क्या है ये बला

बीसीसीआई को इस वजह से करना पड़ा ये काम
नई दिल्ली (जेएनएन)। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने किरकिरी से बचने के लिए अब यो-यो टेस्ट के बाद ही राष्ट्रीय टीम के लिए खिलाडि़यों का चयन करने का फैसला किया है। बोर्ड को हाल ही में उस समय शर्मिदगी का सामना करना पड़ा था जब टेस्ट टीम में शामिल मुहम्मद शमी और वनडे टीम में चुने गए अंबाती रायुडू यो-यो टेस्ट में फेल हो गए थे। राष्ट्रीय टीम के लिए चुने गए इन खिलाडि़यों के अलावा इंग्लैंड दौरे के लिए चुने गए भारत-ए के खिलाड़ी संजू सैमसन भी इस टेस्ट में फेल हो गए थे। अफगानिस्तान टेस्ट, भारत और भारत-ए के इंग्लैंड दौरे के लिए टीम की घोषणा पिछले महीने आइपीएल के दौरान की गई थी। इस मुद्दे पर क्रिकेट प्रशासकों की समिति (सीओए) की बैठक में चर्चा की गई, जिसमें सीओए प्रमुख विनोद राय, डायना इडुल्जी, बीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राहुल जौहरी और क्रिकेट संचालन के महाप्रबंधक सबा करीम मौजूद थे। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया, 'आगे से खिलाडि़यों का चयन फिटनेस टेस्ट में पास होने के बाद ही किया जाएगा। इंग्लैंड दौरे के लिए टीम का चयन आइपीएल के दौरान हुआ था, इसलिए खिलाड़ी चयन के बाद फिटनेस टेस्ट के लिए उपलब्ध हो सके। चयन के बाद खिलाड़ी असहज स्थिति में आ जाते हैं और आगे से ऐसा नहीं होगा।'
आसान नहीं है ये टेस्ट पास करना
रायुडू ने आइपीएल में दमदार प्रदर्शन की बदौलत वनडे टीम में वापसी की थी, लेकिन बोर्ड के द्वारा तय किए गए फिटनेस के मानकों पर वह खरे नहीं उतर सके और उनकी जगह इंग्लैंड दौरे पर होने वाली वनडे सीरीज के लिए टीम में सुरेश रैना को शामिल किया गया। पिछले कुछ समय से मैदान के बाहर की गतिविधियों की वजह से सुर्खियों में रहे शमी भी यो-यो टेस्ट में पास नहीं हो सके और अफगानिस्तान के खिलाफ बेंगलुरु में ऐतिहासिक टेस्ट के लिए टीम में उनकी जगह दिल्ली के तेज गेंदबाज नवदीप सैनी को शामिल किया गया था। शमी को इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए टीम चयन से पहले फिटनेस साबित करने का एक और मौका मिलेगा। सीओए की बैठक में यह भी फैसला किया गया कि आगामी रणजी ट्रॉफी में शामिल होने वाली बिहार, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों की नई टीमें ग्रुप-डी में एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगी और सिर्फ एक टीम क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई करेगी।
क्या होता है 'यो-यो टेस्ट'
पिछले कई सालों से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने टीम इंडिया के सभी खिलाड़ियों के लिए यो-यो टेस्ट अनिवार्य कर दिया है। यह टेस्ट खिलाड़ियों की फिटनेस और लचीलेपन को परखने के लिए किया जाता है। यह बीप टेस्ट का एडवांस वर्जन है जिसमें 20-20 मीटर की दूरी पर दो लाइनें बनाकर कोन रख दिए जाते हैं। एक छोर की लाइन पर खिलाड़ी को पैर पीछे की ओर रखना होता है और बीप बजते ही दौड़ लगानी होती है। हर मिनट के बाद गति और बढ़ानी होती है और अगर खिलाड़ी वक्त पर लाइन तक नहीं पहुंच पाता तो उसे दो बीप्स के भीतर लाइन तक पहुंचना होता है। अगर वह ऐसा करने में नाकाम होता है तो उसे फेल माना जाता है।
इतने चाहिए होते हैं अंक
बीसीसीआई ने इस टेस्ट को पास करने के लिए मानक अंक 19.5 रखा है, यानी कि अगर टीम इंडिया में जगह पानी है तो खिलाड़ी को इतने अंक चाहिए ही। टीम इंडिया में विराट कोहली और रवींद्र जडेजा सबसे ज्यादा अंक हासिल करते हैं। वहीं ऑस्ट्रेलियाई प्लेयर्स यो-यो टेस्ट में 21 का स्कोर प्राप्त करते हैं।
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