- विधान परिषद सभापति रमेश यादव की पत्नी मीरा ने पुलिस की पूछताछ में बेटे अभिजीत की हत्या का जुर्म कुबूला

- कोर्ट में बयान से मुकरीं, कहा बेटे ने लगाई फांसी लेकिन पुलिस फंसा रही

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LUCKNOW : विधान परिषद सभापति रमेश यादव के बेटे अभिजीत की हत्या खुद उसकी मां मीरा ने की थी। घटना के प्रकाश में आने के बाद से इसे स्वाभाविक मौत बता रही मीरा ने पुलिस की सख्त पूछताछ में अपना जुर्म कुबूल कर लिया। मीरा ने बताया कि बेटे द्वारा लगातार अपमानित करने से नाराज होकर उसने उसकी हत्या कर दी। हालांकि, जब उसे कोर्ट में पेश किया तो वह एक बार फिर अपने बयान से पलट गई। उसने अभिजीत की मौत की वजह फांसी बताते हुए पुलिस पर साजिशन फंसाने का आरोप लगाया। कोर्ट ने आरोपी मीरा को 14 दिन की जुडीशियल कस्टडी में जेल भेज दिया है।

शराब पीकर करता था अपमानित
सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा के मुताबिक, रविवार रात अभिजीत के शव के पोस्टमार्टम के बाद आई रिपोर्ट में उसकी गला घोंटकर हत्या करने की पुष्टि होने पर शक के आधार पर उसकी मां मीरा यादव को कस्टडी में लिया गया था। पहले तो वह अपने पूर्व के बयान, जिसमें उसने बताया था कि अभिजीत की मौत सीने में दर्द की वजह से हुई है, को दोहराती रही। पर, जब उसे बताया गया कि अभिजीत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत की वजह गला घोंटना पाया गया है तो वह भी सकपका गयी। कुछ देर तक बरगलाने के बाद मीरा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि अभिजीत शराब पीने का आदी हो चुका था। वह अक्सर शराब पीकर आता और उसे अपमानित करता था।

चरित्र पर लगाता था लांछन
मीरा ने पुलिस को बताया कि अभिजीत जब भी शराब पीकर आता तो वह उसके और पिता रमेश यादव के बारे में आपत्तिजनक बातें करता था। मीरा ने बताया कि वह उसे पिता की दूसरी पत्नी बनने के लिये उलाहना देता था और चरित्र पर तमाम लांछन लगाता था। यह बात उसे नागवार गुजरती थी। हालांकि, जब भी मीरा उसे समझाती तो वह उससे झगड़ने लगता। अभिजीत के इस बर्ताव से वह बेहद परेशान थी। उसने बताया कि बीते शनिवार की रात भी अभिजीत शराब के नशे में धुत होकर घर पहुंचा और उसके और पिता रमेश यादव के संबंध को लेकर आपत्तिजनक बातें करने लगा। मीरा ने बताया कि उसने पहले तो अभिजीत को ऐसा न बोलने की ताकीद की लेकिन, वह नहीं माना और गालीगलौज जारी रखी। इसी से नाराज होकर उसने अभिजीत को धक्का दे दिया। जिससे उसका सिर दरवाजे से टकराया और वह चोटिल हो गया। इसी बीच मौका देख मीरा ने दुपट्टे से बेटे अभिजीत का गला कस दिया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

मौत के बाद पछतावा
मीरा ने पुलिस को बताया कि गुस्से में उसने बेटे अभिजीत का गला तो घोंट दिया लेकिन, जैसे ही वह निढाल हुआ उसे देख उसकी ममता जाग उठी और उसे पछतावा होने लगा। उसने अभिजीत के गले में सोफ्रामाइसिन ऑएनमेंट (चोट में लगाए जाने वाले मरहम) लगाया। लेकिन, अभिजीत के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई। पूरी रात वह शव के पास ही बैठ पुलिस से बचने का उपाय सोचती रही। सुबह होते ही उसने बड़े बेटे अभिषेक को बुलाया और अभिजीत की मौत हार्ट अटैक से होना बताते हुए तुरंत अंतिम संस्कार को कहा। जिसके बाद अभिषेक ने आनन-फानन अभिजीत के शव के अंतिम संस्कार की तैयारी की और शव लेकर वैकुंठ धाम के लिये चल पड़े। हालांकि, पुलिस ने बीच रास्ते शव यात्रा रोककर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया था।

दशहरे में भी की थी हत्या की कोशिश
मीरा ने बताया कि दशहरे के दिन भी अभिजीत शराब के नशे में धुत होकर घर पहुंचा था। जिसके बाद उसने पिता रमेश के साथ उसके संबंधों को लेकर तमाम आपत्तिजनक बातें कहीं थीं। मीरा ने बताया कि उसने उस वक्त भी अभिजीत की हत्या की कोशिश की लेकिन, वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो सकी थी।

कोर्ट में बयान से मुकरी
मीरा के कुबूलनामे के बाद हजरतगंज पुलिस ने उसे अरेस्ट कर सोमवार दोपहर कोर्ट में प्रस्तुत किया। पर, कोर्ट पहुंचते ही मीरा पुलिस के सामने दिये अपने बयान से पलट गई। उसने कहा कि अभिजीत की मौत फांसी लगाने की वजह से हुई थी। लेकिन, पुलिस ने उसे साजिशन हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। हालांकि, मीरा की यह दलील कोर्ट के सामने टिक न सकी और कोर्ट ने उसे 14 दिन की जुडीशियल कस्टडी में जेल भेज दिया।

यह थी घटना
दारुलशफा के फ्लैट नंबर बी-137 में एटा के एमएलसी व विधानपरिषद के सभापति रमेश यादव की दूसरी पत्नी मीरा अपने दो बेटों अभिषेक व अभिजीत उर्फ विवेक के साथ रहती थीं। मीरा ने बताया कि शनिवार रात छोटा बेटा अभिजीत दोस्तों संग बाहर गया हुआ था। देररात वापस लौटने के बाद वह अपने कमरे में जाकर लेट गया। रविवार सुबह अभिजीत संदिग्ध हालत में मृत मिला। जिसके बाद परिजनों ने आनन-फानन अभिजीत के अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी। पुलिस ने मृतक अभिजीत की मां मीरा से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि अभिजीत को रात में सीने में तेज दर्द उठा था। जिस पर उन्होंने उसके सीने व पीठ पर बाम लगाया था। कुछ देर बाद दर्द से राहत मिलने पर अभिजीत सो गया। जिसके बाद वे भी सो गई। रविवार सुबह जब वह सोकर उठीं तो देखा कि अभिजीत की मौत हो चुकी है। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस को मीरा ने बताया कि अभिजीत की मौत स्वाभाविक है, इसलिए वे लोग किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते।

अंतिम संस्कार की इजाजत

मां का बयान सुनकर सभी पुलिस अधिकारी चुप्पी साध गए और उन्होंने शव का अंतिम संस्कार करने की इजाजत दे दी। इजाजत मिलने के बाद परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिये वैकुंठ धाम के लिये चल पड़े। इसी बीच एक आला पुलिस अधिकारी के पास किसी ने फोन कर सूचना दी कि अभिजीत की मौत स्वाभाविक नहीं बल्कि, इसमें कोई राज है। जिसके बाद हरकत में आई हजरतगंज पुलिस ने वैकुंठ धाम की ओर चल पड़ी शव यात्रा को नेशनल पीजी कॉलेज के करीब रोक लिया और शव को कब्जे में लेकर जबरन पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया गया। रविवार देरशाम अभिजीत के शव का पांच डॉक्टर्स के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि अभिजीत की मौत रस्सी या तार जैसी किसी चीज से गला घोंटने से हुई है। उसके सिर के पिछले हिस्से पर मौत से पहले की चोट का निशान भी पाया गया था।